अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)
Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini
महर्षि पाणिनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८८ अष्टाध्यायीसूत्रपाठः ( यतिबोधसहितः ) ३१ इजादेः सनुमः। | ५० सर्वत्र शाकल्यस्य। ३२ वा निंसनिक्षनिन्दाम्। | ५१ दीर्घादाचार्याणाम्। ३३ न भाभूपूकमिगमिप्यायी- | ५२ झलां जश्झशि। वेपाम्। | ५३ अभ्यासे चर्च। ३४ षात्पदान्तात्। | ५४ खरि च। ३५ नशेः षान्तस्य। | ५५ वावसाने। ३६ पदान्तस्य। | ५६ अणोऽप्रगृह्यस्यानुनासिकः। ३७ पदव्यवायेऽपि। | ५७ अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः। ३८ क्षुभ्नादिषु च। | ५८ वा पदान्तस्य। ३९ स्तोः श्चुना श्चुः। | ५९ तोर्लि। ४० ष्टुना ष्टुः। | ६० उदः स्थास्तम्भोः पूर्वस्य। ४१ न पदान्ताट् टोरनाम्। | ६१ झयो होऽन्यतरस्याम्। ४२ तोः षि। | ६२ शश्छोऽटि। ४३ शात्। | ६३ हलो यमां यमि लोपः। ४४ यरोऽनुनासिकेऽनुनासिको वा। | ६४ झरो झरि सवर्णे। ४५ अचो रहाभ्यां द्वे। | ६५ उदात्तादनुदात्तस्य स्वरितः। ४६ अनचि च। | ६६ नोदात्तस्वरितोदयमगार्य- ४७ नादिन्याक्रोशे पुत्रस्य। | काश्यपगालवानाम्। ४८ शरोऽचि। | ६७ अ अ। ४९ त्रिप्रभृतिषु शाकटायनस्य। | इति श्रीपाणिनिमुनिप्रणीतोऽष्टाध्यायीसूत्रपाठः ( यतिबोधसहितः ) समाप्तः॥ ओ३म् द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वँ शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सामा शान्तिरेधि। ओ३म् शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥