भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

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रसभेदीयाध्यायः १० ]

सूत्रस्थानम्

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तारतम्य—तर-तम के भाव को 'तारतम्य' कहते हैं। दो द्रव्यों में एक को उत्तम या अधम बतलाने के लिए 'तर' का प्रयोग होता है और वहीं अनेक में एक को बतलाने के लिए 'तम' का प्रयोग होता है। दूसरा प्रयोग इस प्रकार है—यह द्रव्य उससे गुरुतर है अथवा यह द्रव्य उन सबमें गुरुतम है। इसी प्रकार लघुतर, लघुतम प्रयोग भी होते हैं, तीसरा प्रयोग है—मधुर, मधुरतर, मधुरतम आदि।

इस प्रकार वैद्यरत्न पण्डित तारादत्त त्रिपाठी के पुत्र डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी द्वारा विरचित निर्मला हिन्दी व्याख्या, विशेष वक्तव्य आदि से विभूषित अष्टाङ्गहृदय-सूत्रस्थान में रसभेदीय नामक दसवाँ अध्याय समाप्त ॥ १० ॥

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