भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 387 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 87

ऋतुचर्याध्यायः ३ ]

सूत्रस्थानम्

५१

शीते वर्षासु चाद्यांस्त्रीन् वसन्तेऽन्यान् रसान्भजेत् ॥५५॥

स्वादुं निदाघे, शरदि स्वादुतिकृष्णायकान् । शरद्भसन्त्यो रूक्षं शीतं घर्मघनान्तयोः ॥५६॥

अन्नपानं समासेन विपरीतमतोऽन्यदा ।

संक्षिप्त ऋतुचर्या —विस्तार से कहीं गई ऋतुचर्या का अब यहाँ संक्षेप से वर्णन किया जा रहा है। शीतकाल (हेमन्त तथा शिशिर ऋतु) में और वर्षा ऋतु में आरम्भ के तीन (मधुर, अम्ल, लवण) रसों का सेवन करें। वसन्त ऋतु में अन्तिम तीन (तिक्त, कटु, कषाय) रसों का सेवन करें। ग्रीष्म ऋतु में विशेष करके मधुररस का सेवन करें। शरद् ऋतु में मधुर, तिक्त, कषाय रसों का सेवन करें। शरद् तथा वसन्त ऋतुओं में रूक्ष अन्न (आहार) तथा पेय लें। ग्रीष्म एवं घनान्त (शरद्) ऋतुओं में शीतगुण-प्रधान अन्न-पान का सेवन करें और हेमन्त, शिशिर, वर्षा ऋतुओं में उक्त (रूक्ष, शीत) के विपरीत स्निग्ध एवं उष्ण अन्नपान का सेवन करना चाहिए ॥५५-५६॥

बक्तव्य —श्री अरुणदत्त अपनी व्याख्या में 'अन्यदा' का अर्थ 'हेमन्तशिशिरवसन्तवर्षाख्ये काले' करते हैं, श्रीहेमाद्रि यहाँ मौन है। अन्य टीकाकार 'अन्यदा' शब्द से हेमन्त, शिशिर एवं वर्षा ऋतुओं का ग्रहण करते हैं। ध्यान दें—वर्षाकाल में जब वर्षा होती है तो मौसम उतनी देर था उतने दिनों तक शीतल हो जाता है, तब शीतकाल के समान इसके विपरीत जब वर्षा न हो और गर्मी पड़ रही हो तब ग्रीष्म या शरद् ऋतु के समान अन्न (आहारों) तथा रसों का सेवन करना चाहिए।

ज्योतिष सम्मत ऋतुक्रम

क्रम.राशिमासऋतु
१.मीन, मेषचैत्र, वैशाखवसन्त
२.वृष, मिथुनज्येष्ठ, आषाढ़ग्रीष्म
३.कर्क, सिंहश्रावण, भाद्रपदवर्षा
४.कन्या, तुलाआश्विन, कार्तिकशरत्
५.वृश्चिक, धनुमार्गशीर्ष, पौषहेमन्त
६.मकर, कुम्भमाघ, फाल्गुनशिशिर

संशोधनोपयोगी ऋतुक्रम

क्रम.राशिमासऋतु
१.मेष, वृषवैशाख, ज्येष्ठग्रीष्म
२.मिथुन, कर्कआषाढ़, श्रावणप्रावृद्
३.सिंह, कन्याभाद्रपद, आश्विनवर्षा
४.तुला, वृश्चिककार्तिक, मार्गशीर्षशरत्
५.धनु, मकरपौष, माघहेमन्त
६.कुम्भ, मीनफाल्गुन, चैत्रवसन्त