अष्टावक्र गीता

अष्टावक्र गीता
Ashtavakra Gita
महर्षि अष्टावक्र द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished405 पृष्ठ
पृष्ठ 388, कुल 405 में से
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उन्नीसवाँ प्रकरण । ३८१
कहाँ है ? और भय कहाँ है ? और अभय कहाँ है ? ये सब
अन्तःकरण के ही धर्म हैं, सो अन्तःकरण ही मिथ्या है ॥ ५ ॥
मूलम् ।
क्व दूरं क्व समीपं वा बाह्यं क्वाभ्यन्तरं क्व वा ।
क्वस्थूलंकवचवा सूक्ष्मं स्वमहिम्नि स्थितस्य मे ॥ ६ ॥
पदच्छेदः ।
क्व, दूरम्, क्व, समीपम्, वा, बाह्यम्, क्व, आभ्यन्तरम्,
क्व, वा, क्व, स्थूलम्, क्व, च, वा, सूक्ष्मम्, स्वमहिम्नि,
स्थितस्य, मे ॥
| अन्वयः । | शब्दार्थ । | अन्वयः । | शब्दार्थ । |
|---|---|---|---|
| स्वमहिम्नि | = अपनी महिमा में | समीपम् | = समीप है ? |
| स्थितस्य | = स्थित हुए | च | = और |
| मे | = मुझको | क्व | = कहाँ |
| क्व | = कहाँ | अभ्यन्तरम् | = आभ्यन्तर है ? |
| दूरम् | = दूर है ? | च | = और |
| च | = और | क्व | = कहाँ |
| क्व | = कहाँ | स्थूलम् | = स्थूल है ? |
| बाह्यम् | = बाह्य है ? | च | = और |
| च | = और | क्व | = कहाँ |
| क्व | = कहाँ | सूक्ष्मम् | = सूक्ष्म है ? |
भावार्थ ।
मेरे में दूर कहाँ है ? समीप कहाँ है ? बाह्य कहाँ है? अन्तर