अष्टावक्र गीता

अष्टावक्र गीता
Ashtavakra Gita
महर्षि अष्टावक्र द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished405 पृष्ठ
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३८२ अष्टावक्र-गीता भा० टी० स०
कहाँ है ? स्थूल कहाँ है ? सूक्ष्म कहाँ है ? जो सर्वत्र परिपूर्ण है, उसमें कुछ भी नहीं बनता है ॥ ६ ॥
मूलम् ।
क्व मृत्युर्जीवितं वा क्व लोकाः क्वास्य क्व लौकिकम् । क्व लयः क्व समाधिर्वा स्वमहिम्निस्थितस्य मे ॥ ७ ॥
पदच्छेदः ।
क्व, मृत्युः, जीवितम, वा, क्व, लोकाः, क्व, अस्य, क्व, लौकिकम्, क्व, लयः, क्व, समाधिः, वा, स्वमहिम्नि स्थितस्य मे ॥
| अन्वयः । | शब्दार्थ । | अन्वयः । | शब्दार्थ । |
|---|---|---|---|
| स्वमहिम्नि | = अपनी महिमा में | लोकाः | = भू आदि लोक है ? |
| स्थितस्य | = स्थित हुए | अस्य | = इस मुझ ज्ञानी को |
| मे | = मुझको | क्व | = कहाँ |
| क्व | = कहाँ | लौकिकम् | = लौकिक व्यवहार है ? |
| मृत्युः | = मृत्यु है ? | क्व | = कहाँ |
| वा | = अथवा | लयः | = लय है ? |
| क्व | = कहाँ | वा | = अथवा |
| जीवितम् | = जीवित है ? | क्व | = कहाँ |
| क्व | = कहाँ | समाधि | = समाधि है ? |
भावार्थ ।
मृत्यु कहाँ है ? और जीवन कहाँ है ? आत्मा तीनों कालों में एकरस ज्यों का त्यों अपनी महिमा में स्थित है । उसमें जन्म कहाँ ? मरण कहाँ ? लोक कहाँ ? लोकों में