भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 265, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 265

आर्तवा ऋतुभिः संविदाना अनेन मा त्रिवृता पारयन्तु.. (२) अग्नि, चंद्र, सूर्य, पृथ्वी, जल, आकाश, अंतरिक्ष, दिशाएं और उपदिशाएं इस त्रिवृत्त अर्थात् नौ कर्मों से मुझे ऋतुओं सहित प्राप्त हो कर पार करें. इस में ऋतुओं के अंश भी सहायता करें. (२) त्रयः पोषास्त्रिवृति श्रयन्तामनक्तु पूषा पयसा घृतेन. अन्नस्य भूमा पुरुषस्य भूमा भूमा पशूनां त इह श्रयन्ताम्.. (३) तीन पुष्टिकारक इस त्रिवृत्त के आश्रित हों. उषा देवी दूध और घी से इस यज्ञ कर्म को बढ़ाएं. इस के आश्रय में अन्न, पुरुषों और पशुओं की अधिकता रहे. (३) इममादित्या वसुना समुक्षतेममग्ने वर्धय वावृधानः. इममिन्द्र सं सृज वीर्येणास्मिन् त्रिवृच्छ्रयतां पोषयिष्णू.. (४) आदित्य इस बालक को धन से पूर्ण करें. हे अग्नि, तुम स्वयं बढ़ते हुए इस बालक की भी वृद्धि करो. हे इंद्र! तुम इसे वीर्य युक्त करो. पोषण करने वाला त्रिवृत्त इस का आश्रित हो. (४) भूमिष्ट्वा पातु हरितेन विश्वभृदग्निः पिपर्त्वयसा सजोषाः. वीरुद्भिष्टे अर्जुनं संविदानं दक्षं दधातु सुमनस्यमानम्.. (५) पृथ्वी स्वर्ग के द्वारा तेरी रक्षा करे. विश्व का भरणपोषण करने वाले अग्नि देव लोहे के द्वारा तेरा पालन करें तथा तुझ में लताओं से प्राप्त जल के द्वारा बल धारण करें. (५) त्रेधा जातं जन्मनेदं हिरण्यमग्नेरेकं प्रियतमं बभूव सोमस्यैकं हिंसितस्य परापतत्. अपामेकं वेधसां रेत आहुस्तत् ते हिरण्यं त्रिवृदस्त्वायुषे.. (६) जन्म से ही यह स्वर्ण तीन प्रकार से उत्पन्न हुआ है. अग्नि को उस स्वर्ण का एक जन्म प्रिय हुआ. वह सोम के पीड़ित होने पर गिरा. विद्वान् लोग एक को जलों का वीर्य कहते थे. हे ब्रह्मचारी! वह स्वर्ण तेरी आयु वृद्धि के हेतु त्रिवृत्त अर्थात् तिगुना हो जाए. (६) त्र्यायुषं जमदग्नेः कश्यपस्य त्र्यायुषम्. त्रेधामृतस्य चक्षणं त्रीण्यायूंषि ते ऽ करम्.. (७) जमदग्नि ऋषि की तीन आयु हैं—बचपन, यौवन और वृद्धावस्था. महर्षि कश्यप की भी यही तीन अवस्थाएं हैं. अमृत के निदर्शन रूप में तीनों आयु मैं तुझे देता हूं. (७) त्रयः सुपर्णास्त्रिवृता यदायन्नेकाक्षरमभिसंभूय शक्राः. ebook converter DEMO Watermarks*