भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 1063 में से

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दूर भगाओ. (६) त्वमग्ने यातुधानानुपबद्धाँ इहा वह. अथैषामिन्द्रो वज्रेणापि शीर्षाणि वृश्चतु.. (७) हे अग्नि! तुम रस्सी आदि से राक्षसों के हाथपैर बांध कर उन्हें यहां ले आओ. इस के पश्चात इंद्र अपने वज्र से उन के सिर काट दें. (७) सूक्त-८ देवता—बृहस्पति इदं हविर्यातुधानान् नदी फेनमिव वहत्. यं इदं स्त्री पुमानकरिह स स्तुवतां जनः.. (१) मेरे द्वारा अग्नि आदि देवों को दिया हुआ घृत आदि हवि दुष्ट राक्षसों को यहां से उसी प्रकार दूर हटा दे, जिस प्रकार नदी की धारा फेन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है. मेरे प्रति अभिचार, जादू, टोना, टोटका करने वाले स्त्रीपुरुष अपने मनोरथ में असफल हो कर यहां मेरी शरण में आएं और मेरी स्तुति करें. (१) अयं स्तुवान आगमदिमं स्म प्रति हर्यत. बृहस्पते वशे लब्ध्वाग्नीषोमा वि विध्यतम्.. (२) हे बृहस्पति आदि देवो! आप की स्तुति करता हुआ जो यह मनुष्य आप की शरण में आया है, यह हमारा विरोधी शत्रु है. हे बृहस्पति, अग्नि एवं सोम! इन उपद्रवकारियों को वश में कर के अनेक प्रकार से दंडित करो. (२) यातुधानस्य सोमप जहि प्रजां नयस्व च. नि स्तुवानस्य पातय परमक्ष्युतावरम्.. (३) हे सोमरस पीने वाले अग्नि देव! तुम राक्षसों की संतानों के समीप पहुंच कर उन्हें समाप्त कर दो और हमारी संतान की रक्षा करो. हमारे जो शत्रु तुम से भयभीत हो कर तुम्हारी प्रार्थना करते हैं, तुम उन की दाईं और बाईं दोनों आंखें बाहर निकाल लो. (३) यत्रैषामग्ने जनिमानि वेत्थ गुहा सतामत्रिणां जातवेदः. तांस्त्वं ब्रह्मणा वावृधानो जह्येषां शततर्हमग्ने.. (४) हे सब के विषय में जानने वाले अग्नि! तुम गुहा में निवास करने वाले राक्षसों को जानते हो. हे मंत्र द्वारा वृद्धि पाते हुए अग्नि! इन राक्षसों द्वारा सैकड़ों प्रकार की हिंसा को रोको एवं संतान सहित इन का विनाश करो. (४) सूक्त-९ देवता—वसु ebook converter DEMO Watermarks*

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