अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 499, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकी मृत्यु का विनाश करते हैं. जो इस बात को जानता है, वह समृद्धि की प्रजाओं और पशुओं को प्राप्त करता है. (५) तस्मा अभ्रो भवन् हिङ्कृणोति स्तनयन् प्र स्तौति.. (६) उत्पन्न होने वाला बादल उस के लिए हुंकार करता है और गर्जन करता हुआ उस की प्रशंसा करता है. (६) विद्योतमानः प्रति हरति वर्षन्नुद्गायत्युद्गृह्णन् निधनम्. निधनं भूत्याः प्रजायाः पशूनां भवति य एवं वेद.. (७) बादल दमकता हुआ उस का प्रतिहार करता है, बरसता हुआ उद्गान करता है तथा उद्ग्रहण करता हुआ उसे पूर्णता प्रदान करता है. जो इस प्रकार जानता है, वह प्रजाओं और पशुओं की संपन्नता प्राप्त करता है. (७) अतिथीन् प्रति पश्यति हिङ्कृणोत्यभि वदति प्र स्तौत्युदकं याचत्युद्गायति.. (८) वह अतिथियों को देखता है तो उन्हें बुलाता है, अभिवादन करता है, जल प्रस्तुत करता है और उन की प्रशंसा करता है. (८) उप हरति प्रति हरत्युच्छिष्टं निधनम्.. (९) वह अशेष पूर्णता का उपहार और प्रतिहार करता है. (९) निधनं भूत्याः प्रजायाः पशूनां भवति य एवं वेद.. (१०) जो इस प्रकार जानता है, वह प्रजा और पशुओं की समृद्धि की अंतिम अवस्था को प्राप्त करता है. (१०) सूक्त-११ देवता—अतिथि, विद्या यत् क्षत्तारं ह्वयत्या श्रावयत्येव तत्.. (१) जो क्षत्ता अर्थात् इच्छित कार्य करने वाले का आह्वान करता है, वह श्रुति को ही सुनाता है. (१) यत् प्रतिशृणोति प्रत्याश्रावयत्येव तत्.. (२) जो प्रतिज्ञा करता है, वही श्रुति को सुनाने का आग्रह करता है. (२) ebook converter DEMO Watermarks*