भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 547, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 547

से बनी मणि को बल प्राप्ति के लिए बांधा था. उसे सूर्य ने मुझे दिया था. इस से मैं ने इन सभी दिशाओं को जीत लिया था. हे यजमान! यह मणि तेरे लिए प्रतिदिन और बार-बार ऐश्वर्य प्रदान करे, जिस की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर सके. (९) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्मणिं फालं घृतश्रुतमुग्रं खदिरमोजसे. तं बिभ्रच्चन्द्रमा मणिमसुराणां पुरो ऽ जयद् दानवानां हिरण्ययी:. सो अस्मै श्रियमिद् दुहे भूयोभूयः श्वःश्वस्तेन त्वं द्विषतो जहि.. (१०) बृहस्पति ने फाल से उत्पन्न, घी टपकाने वाली, शक्तिशालिनी एवं खैर वृक्ष की लकड़ी से बनी मणि को बल प्राप्ति के लिए बांधा था. उसे धारण करते हुए चंद्रमा ने असुरों के नगरों एवं दानियों के स्वर्ण को जीत लिया था. यह मणि इस यजमान के लिए बारबार एवं प्रतिदिन श्री प्रदान करे. हे यजमान! उस की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (१०) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्वाताय मणिमाशवे. सो अस्मै वाजिनं दुहे भूयोभूयः श्वःश्वस्तेन त्वं द्विषतो जहि. (११) बृहस्पति ने जिस को यह मणि वायु के समान शीघ्र गति प्राप्त करने के लिए बांधी, उस के लिए यह मणि प्रतिदिन एवं बारबार घोड़े प्रदान करे. हे यजमान! उन की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (११) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्वाताय मणिमाशवे. तेनेमां मणिना कृषिमश्विनावभि रक्षतः. स भिषग्भ्यां महो दुहे भूयोभूयः श्वःश्वस्तेन त्वं द्विषतो जहि.. (१२) बृहस्पति देव ने जिसे यह मणि वायु के समान शीघ्र गति प्राप्त करने के लिए बांधी, उसी मणि के द्वारा अश्विनीकुमार इस कृषि की रक्षा करें. इस ने अश्विनीकुमारों का बारबार एवं प्रतिदिन महत्त्व प्रदान किया. हे यजमान! इस मणि की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (१२) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्वाताय मणिमाशवे. तं बिभ्रत् सविता मणिं तेनेदमजयत् स्वः. सो अस्मै सूनृतां दुहे भूयोभूयः श्वःश्वस्तेन त्वं द्विषतो जहि.. (१३) बृहस्पति देव ने जिस को यह मणि वायु के समान वेग प्राप्त करने के लिए बांधी थी, उसे धारण करते हुए सविता देव ने स्वर्ग को विजय किया. उस ने यजमान के लिए सत्य प्रदान किया. हे यजमान! इस से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (१३) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्वाताय मणिमाशवे. तमापो बिभ्रतीर्मणिं सदा धावन्त्यक्षिताः. ebook converter DEMO Watermarks*