अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 549, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअंक:... (१९) आग्नेय, ईशान आदि अंतर्दिशाओं ने इस मणि को बांधा तथा पूर्व आदि दिशाओं ने भी इस को बांधा. प्रजापति के द्वारा निर्मित यह मणि मेरे शत्रुओं को पराजित करे. (१९) अथर्वाणो अबध्नताथर्वणा अबध्नत. तैर्मेदिनो अङ्गिरसो दस्यूनां बिभिदुः पुरस्तेन त्वं द्विषतो जहि.. (२०) अथर्वा ऋषियों ने इस मणि को बांधा तथा उन की संतान आथर्वणों ने भी इस मणि को बांधा. उन की अर्थात् अथर्वा ऋषियों और उन की संतान की सहायता से शक्तिशाली बने अंगिरा गोत्र वालों ने लुटेरों के नगरों का विनाश कर दिया. हे यजमान! इस मणि की सहायता से तू अपने शत्रुओं को मार. (२०) तं धाता प्रत्यमुञ्चत स भूतं व्यकल्पयत्. तेन त्वं द्विषतो जहि.. (२१) इस मणि को विधाता ने हमें दिया. विधाता ने इस मणि की सहायता से समस्त प्राणियों की रचना की. हे यजमान! इस मणि की सहायता से तू अपने शत्रुओं का विनाश कर. (२१) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्देवेभ्यो असुरक्षितिम्. स मा ऽ यं मणिरागमद् रसेन सहवर्चसा... (२२) बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि रस और तेज के साथ मेरे पास आई है. (२२) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्देवेभ्यो असुरक्षितिम्. स मा ऽ यं मणिरागमत् सह गोभिरजाविभिरन्नेन प्रजया सह.. (२३) बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि गायों, बकरियों, भेड़ों, अन्न एवं संतान के साथ मुझे प्राप्त हुई है. (२३) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्देवेभ्यो असुरक्षितिम्. स मा ऽ यं मणिरागमत् सह व्रीहियवाभ्यां महसा भूत्या सह.. (२४) बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि गेहूं, जौ एवं महान विभूति के साथ मुझे प्राप्त हुई है. (२४) यमबध्नाद् बृहस्पतिर्देवेभ्यो असुरक्षितिम्. स मा ऽ यं मणिरागन्मन्धोर्घृतस्य धारया कीलालेन मणिः सह.. (२५) असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को बृहस्पति ने देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि मधु एवं घृत की धाराओं तथा मदिरा की धाराओं के साथ मुझे प्राप्त हुई है. (२५) ebook converter DEMO Watermarks*