भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 736, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 736

श्वास और उच्छ्वास उस के रथ के घोड़े हैं. प्राण उस का सारथी है और वायु उस सारथी का चाबुक है. (७) कीर्तिश्च यशश्च पुरःसरावैनं कीर्तिर्गच्छत्या यशो गच्छति य एवं वेद.. (८) कीर्ति और यश उस के आगे चलने वाले हैं. कीर्ति उस के समीप आती है तथा यश उस के पास आता है. जो इस प्रकार जानता है, उसे कीर्ति और यश प्राप्त होते हैं. (८) स उदतिष्ठत् स दक्षिणां दिशमनु व्य चलत्.. (९) वह उठा और दक्षिण दिशा की ओर चला. (९) तं यज्ञायज्ञियं च वामदेव्यं च यज्ञश्च यजमानश्च पशवश्चानुव्यचलन्.. (१०) यज्ञ करने वाले और न करने वाले, वामदेव से संबंधित, यज्ञ, यजमान उस के अत्यधिक अनुकूल हुए और पीछेपीछे चले. (१०) यज्ञायज्ञियाय च वै स वामदेव्याय च यज्ञाय च यजमानाय च पशुभ्यश्च वृश्चते य एवं विद्वांसं व्रात्यमुपवदति.. (११) जो इस प्रकार के विद्वान् और व्रत का आचरण करने वाले का उपहास करता है, वह यज्ञ करने वाले तथा न करने वाले, वामदेव संबंधी का, यज्ञ का, यजमान का और पशुओं का अपराधी बनता है. (११) यज्ञायज्ञियस्य च वै स वामदेव्यस्य च यज्ञस्य च यजमानस्य च पशूनां च प्रियं धाम भवति तस्य दक्षिणायां दिशि.. (१२) जो उस का सत्कार करता है, वह यज्ञाज्ञिय, वामदेव्य, यज्ञ, यजमान और पशुओं का प्रिय होता है. उस का स्थान दक्षिण दिशा में होता है. (१२) उषाः पुंश्चली मन्त्रो मागधो विज्ञानं वासो ऽ हरुष्णीषं रात्री केशा हरितौ प्रवर्त्तौ कल्मलिर्मणिः.. (१३) उस की उषा स्त्री, मंत्र प्रशंसक, विज्ञान वस्त्र, दिन पगड़ी, रात्रि केश, किरण कुंडल तथा तारे मणि के समान होते हैं. (१३) अमावास्या च पौर्णमासी च परिष्कन्दौ मनो विपथम्. मातरिश्वा च पवमानश्च विपथवाहौ वातः सारथी रेष्मा प्रतोदः. कीर्तिश्च यशश्च पुरःसरावैनं कीर्तिर्गच्छत्या यशो गच्छति य एवं वेद.. (१४) अमावस्या और पूर्णमासी उस की रक्षा करने वाली होती हैं. मन उस का युद्ध संबंधी रथ ebook converter DEMO Watermarks*