भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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रात्री तस्य प्रतीत्य प्र ग्रीवाः प्र शिरो हनत्.. (९) इस समय जो चोर, हिंसा करने वाला तथा मरणधर्मा शत्रु आता है, हे सुंदर रूप वाली रात्रि! मेरे समीप आने वाले शत्रु के समीप जा कर उस की जिह्वा और शीश को काट दो. (९) प्र पादौ न यथायति प्र हस्तौ न यथाशिषत्. यो मलिम्लुरुपायति स संपिष्टो अपायति. अपायति स्वपायति शुष्के स्थाणावपायति.. (१०) हे रात्रि! तुम मेरे शत्रु के पैरों को इस प्रकार काट दो कि वह फिर आने योग्य न रहे. तुम उस के हाथों को इस प्रकार काट दो जिस से वह मेरा आलिंगन न कर सके. जो चोर मेरे समीप आता है. उसे इस प्रकार पीस दो कि वह मुझ से दूर चला जाए. वह भलीभांति पूर्ण रूप से चला जाए. वह मेरे पास से जा कर सूखे खंभे का आश्रय प्राप्त करे. (१०) सूक्त-५० देवता—रात्रि अध रात्रि तृष्टधूममशीर्षाणमहिं कृणु. अक्षौ वृकस्य निर्जह्यास्तेन तं द्रुपदे जहि.. (१) हे रात्रि! जिस सर्प की धुएं के समान सांस कष्टदायक है, उस का सिर काट दो. भेड़िए को नेत्रहीन कर के वृक्ष के नीचे मार डालो. (१) ये ते रात्र्यनड्वाहस्तीक्ष्णशृङ्गाः स्वाशवः. तेभिर्नो अद्य पारयाति दुर्गाणि विश्वाहा.. (२) हे रात्रि! तुम्हारे वाहन जो नुकीले सींगों वाले तथा अत्यधिक शीघ्र चलने वाले बैल हैं, उन के द्वारा हमें सभी रात्रियों के सभी अनर्थों से पार कराओ. (२) रात्रिंरात्रिमरिष्यन्तस्तरेम तन्वा वयम्. गम्भीरमप्लवा इव न तरेयुररातयः.. (३) सभी रात्रियों में गमन करते हुए हम शरीर से पुनः पौत्र आदि के साथ रात्रि को पार करें. हमारे शत्रु नदी पार करने के साथ नाव आदि से हीन पुरुषों के समान रात्रि को पार न कर पाएं अर्थात् रात्रि में ही नष्ट हो जाएं. (३) यथा शाम्याकः प्रपतन्नपवान् नानुविद्यते. एवा रात्रि प्र पातय यो अस्माँ अभ्यघायति.. (४) जिस प्रकार सवां अन्न पकने पर गिरता हुआ सारहीन हो जाता है तथा बिलकुल नहीं बचता, हे रात्रि! जो हमारे प्रति हिंसा करने की इच्छा रखता है, उसे उसी प्रकार गिरा दो. (४) ebook converter DEMO Watermarks*