आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished112 पृष्ठ
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आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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| योगमत | संतमत |
|---|---|
| 10. योगमत निराकार निरंजन की ही सत्ता को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है। | 10. संतमत में निराकार सत्ता से आगे चौथे लोक अर्थात् अमर लोक की बात की जाती है। |
| 11. योगमत में कमाई का फल खत्म होने पर वापिस माता के पेट में आना पड़ता है। | 11. संतमत में जीव सदा के लिए आवागमन से मुक्त हो जाता है और अपने निजधाम सत्य लोक को चला जाता है। |
| 12. योगमत वैशाखियों के सहारे चलता है जो कि शास्त्रों की साक्षी देकर अपने आप को स्थापित करता है। | 12. संतमत में संत सदगुरु अपने अनुभव से बोलता है जो किसी का मोहताज नहीं होता है। |
| 13. इसमें रिद्धि-सिद्धि और दिव्य शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, मगर आत्मा का ज्ञान नहीं होता है। | 13. संतमत में जीव को आत्मज्ञान होने से आध्यात्मिक शक्ति याँ मिलती हैं। |
| 14. योगमत मीन और पपील मार्ग है। | 14. जबकि संतमत विहंगम मार्ग है। |
- 1. पाँच शब्द औ पाँचों मुद्रा, सोई निश्चय माना। आगे पूरण पुरुष पुरातन, उसकी खबर न जाना ॥
- 2. नौ नाथ चौरासी सिद्ध लों, पाँच शब्द में अटके। मुद्रा साथ रहे घट भीतर, फिर औंठे मुँह लटके ॥
- 3. काया नाम सबहिं गुण गावैं, विदेह नाम कोई बिरला पावै। विदेह नाम पावेगा सोई, जिसका सदगुरु साँचा होई ॥
- 4. जब तक गुरु मिले नहीं साँचा, तब तक गुरु करो दस पाँचा ॥