भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

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साहिब बन्दगी

दसवें द्वार से आगे—संत वाणी

दशम द्वार से जीव जब जाई। स्वर्ग लोक में वासा पाई ॥ 11वें द्वार से जीव जब जाता। परम पुरुष के लोक समाता ॥

दसवें द्वार से न्यारा द्वारा। ताका भेद कहूँ मैं सारा ॥

नौ द्वारे संसार सब, दसवें योगी साध। एकादश खिड़की बनी, जानत संत सुजान ॥

—कबीर साहिब

.... आठ अटाकी अटारी मजारा, देखा पुरुष न्यारा। न निराकार आकार न ज्योति, नहीं वहाँ वेद विचारा। ओंकार कर्ता नहीं कोई, नहीं वहाँ काल पसारा। वह साहिब सब संत पुकारा, और पाखण्ड है सारा। सदगुरु चीन्ह दीन्ह यह मारग, नानक नजर निहारा ॥

—गुरु नानक देव जी

पलटू कहै साँच कै मानो। और बात झूठ कै जानो ॥ जहवाँ धरती नाहि अकासा। चाँद सूरज नाहि परगासा ॥ जहवाँ ब्रह्मा विष्णु न जाहीं। दस अवतार न तहाँ समाहीं ॥ आदि जोति ना बसै निरंजन। जहवाँ शून्य शब्द नहि गंजन ॥ निरंकार ना उहाँ अकारा। अक्षर शब्द नहि विस्तारा ॥ जहवाँ जोगी जाए न पावै। महादेव ना तारी लावै ॥ जहवाँ हृद अनहद नहि जावै। बेहद वहाँ रहनी ना पावै ॥ जहवाँ नाहि अगनि परगासा। पाँच तत्व ना चलता स्वाँसा ॥

—पलटू साहिब