आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
पृष्ठ 109, कुल 112 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
109
संसार से अलग!
हमारा पंथ भक्ति जगत में वैज्ञानिक तरीके से क्रांति लाया है। सबसे पहले पाँच बातें पूरे संसार को अलग बता रहे हैं।
1. यह संसार काल का देश है। यहाँ तीन लोक में काल-निरंजन का राज्य है। इसी को वेदों ने निराकार, निरंकार, निरंजन, पार-ब्रह्म आदि नामों से पुकारा है। गण, गंधर्व, सिद्ध, साधक, ऋषि-मुनि, पीर-पैगंबर आदि यहाँ तक गये।
2. अमरलोक जाने के लिए (मुक्ति के लिए) कमाई कुछ नहीं करनी है। यह सारा कार्य सदगुरु कृपा से होता है।
3. नाम 52 अक्षर में, लिखने, पढ़ने अथवा सुनने वाला नहीं। नाम एक कला है, जो पूर्ण सदगुरु के पास है, जिससे आत्मा को जागृत किया जाता है और आत्मा मन से अलग हो जाती है। इसे नाम देना कहते हैं। नाम शरीर को नहीं आत्मा को दिया जाता है।
4. इस निरंजन के आगे महाशून्य है, जहाँ कोई वस्तु नहीं है। इनके नाम अचिन्त लोक, सोहंग लोक, मूल सुरति लोक, अंकुर लोक, इच्छा लोक, वाणी लोक और सहज लोक हैं। यह समस्त लोक महाशून्य में हैं। सहज अंश तक जो भी सृष्टि है, इसका परम नाश है।
सहज पुरुष तक जेतक भाखा। सो रचना परलै ते राखा ॥
आगे अक्षय लोक है भाई। आदि पुरुष तहाँ आप रहाई ॥
5. इसके ऊपर अमरधाम, परम-पुरुष का लोक है। यहाँ कभी भी प्रलय नहीं है।
जहवाँ से हँसा आया, अमर है वो लोकवा ॥
तहाँ नहीं परले की छाया, नहीं तहाँ कछु मोह और माया ॥
ज्ञान ध्यान को तहाँ न लेखा, पाप पुण्य तहँवा नहीं देखा ॥
पवन न पानी पुरुष न नारी, हद अनहद तहाँ नाहिं विचारी ॥
यहीं से साहिब आत्माओं के कल्याण के लिए आते हैं।