भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

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साहिब बन्दशी

योगमतसंतमत
1. योगमत में काया का नाम है।
2. योग मत चाचरी, भूचरी, अगोचरी, मुद्राओं के ईर्द-गिर्द घूमता है, जो शरीर में हैं।
3. यह नाम लिखने-पढ़ने में आता है। इनसे काल-पुरुष ने पाँच तत्व पैदा किये और शरीरों की रचना की।
4. योगमत में अनहद धुनों को ही परमात्मा माना जाता है।

5. योगमत करनी अथवा कमाई का मार्ग है। 6. योगमत में सुरति शब्द का अभ्यास किया जाता है। 7. योगमत में काल का नाम लिया जाता है। यह नाम शरीर को दिया जाता है। 8. योगमत में गुरु की भूमिका न के बराबर होती है। 9. योगमत सीमाबद्ध है, जिसमें साधक दसवें द्वार तक ही जाता है। | 1. संतमत में विदेह नाम है। 2. संतमत में पाँच मुद्राओं से आगे शीश से सवा हाथ ऊपर ध्यान रखने को कहा है। 3. यह अकह नाम है जो लिखने-पढ़ने में नहीं आता है और पाँच तत्वों से बाहर है।

4. संतमत में आत्मा किसी शब्द की मोहताज नहीं, क्योंकि आत्मा अपने आप में परिपूर्ण है। 5. यह सहज मार्ग है, गुरु कृपा का मार्ग है और भुंग-मता है। 6. संतमत सुरति को चेतन करने का मार्ग है। 7. संतमत जिंदा नाम प्रदान करता है जोकि शरीर को छोड़ आत्मा को दिया जाता है। 8. संतमत में भक्ति का सार ही संत सदगुरु है। 9. संतमत असीम है जो कि ग्यारहवें द्वार की बात करता है, जो सुरति में है।