भारतकोश
बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

महर्षि बौधायन द्वारा

स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)

DevanagariHindipublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 486 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 178
१२६बौधायन-धर्मसूत्रम्[ वर्णधर्मविचारः

अथ प्रतिलोमासु यच्छूद्रबीजं तदाह—
शूद्राद्वैश्यायां मागधः क्षत्रियायां क्षत्ता ब्राह्मण्यां चण्डालः ॥ ६ ॥
अनु०— शूद्र पुरुष द्वारा वैश्य स्त्री से मागध, क्षत्रिया से क्षत्ता, ब्राह्मणी से चण्डाल उत्पन्न होता है ॥ ६ ॥

अथ वैश्यबीजमुच्यते—
वैश्यात्क्षत्रियायामायोगवो ब्राह्मण्यां वैदेहकः ॥ ७ ॥
अनु०— वैश्य पुरुष द्वारा क्षत्रिया पत्नी से आयोगव तथा ब्राह्मणी से वैदेहक उत्पन्न होते हैं ॥ ७ ॥

क्षत्रियबीजं पुनः—
क्षत्रियाद् ब्राह्मण्यां सूतः ॥ ८ ॥
अनु०— क्षत्रिय पुरुष द्वारा ब्राह्मणी पत्नी से सूत उत्पन्न होता है ॥ ८ ॥

अथ वर्णसङ्करजातानां परस्परसङ्करजातानाह—
अत्राऽम्बष्ठोग्रसंयोगो भवत्यनुलोमः ॥ ९ ॥
अनु०— यदि इनमें अम्बष्ठ पुरुष और उग्र वर्ण की स्त्री का संयोग हो तो अनुलोम पुत्र उत्पन्न होता है ॥ ९ ॥
उत्कृष्टबीजप्रभवायामनुलोमायां जाता अप्यनुलोमा एव भवन्तीत्यभिप्रायः ॥ ९ ॥

क्षत्तृवैदेहकयोः प्रतिलोमः ॥ १० ॥
अनु०— क्षत्ता पुरुष और वैदेहक स्त्री के संयोग से प्रतिलोम पुत्र होता है ॥१०॥
शूद्रक्षत्रियापत्यभवात् प्रतिलोमाद्वैश्यब्राह्मणीप्रभवायां प्रतिलोमायामुत्पन्नोऽपि प्रतिलोमो भवतीत्यर्थः । एवमन्यत्राऽपि प्रयोजकानुसन्धानेन वेदनीयम् ॥ १० ॥

अतः पुनरपि प्रतिलोमानेवाह—
¹उग्राज्जातः क्षत्तायां श्वपाकः ॥ ११ ॥
वैदेहकादम्बष्ठायां वैणः ॥ १२ ॥
निषादाच्छूद्रायां पुल्कसः ॥ १३ ॥


१. See मनु. १० ५.४२.
२. क्षत्तुश्चायां जातः पुल्कसः ( म. १०. १९. ) इति मनुः ।