बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकादशः खण्डः ] द्वितीयप्रश्ने षष्ठोऽध्यायः २५३
उद्धृतपरिपूताभिरद्भिः कार्यं कुर्यात् ॥ २७ ॥
अनु०— (कूप या तालाब से) निकाले हुए तथा छानने आदि से पवित्र किये गये जल से शुद्धि के कार्य करे ॥ २७ ॥
टि०— गोविन्द स्वामी के अनुसार ऐसे जल से आचमन का कार्य न करे।
कार्यं मूत्रपुरीषप्रक्षालनम्, न त्वाचमनम् ॥ २७ ॥
अपविध्य वैदिकानि कर्माण्युभयतः परिच्छिन्ना मध्यमं पदं संश्लेष्यामह इति वदन्तः ॥ २८ ॥
अनु०— वेदोक्त कर्मों का परित्याग कर, दोनों लोकों से अपना नाता तोड़कर, हम मध्यम पद ब्रह्म के साथ अपना संबन्ध जोड़ते हैं, ऐसा कहे ॥ २८ ॥
अस्माल्लोकादमुष्माच्च उभयतः परिच्छिन्नाः विच्छिन्नाः भ्रष्टा वयमस्मै वै लोकाय प्रजोत्पादनं अमुष्मै वैदिकानि कर्माण्यग्निहोत्रादीनि । उभयं च गार्हस्थ्यनिबन्धनं 'मनुष्यलोकः पुत्रेण जय्यः नान्येन कर्मणा पितृलोकः' इति श्रुतेः पितृलोकः देवलोकः। तस्मादुभयभ्रष्टा वयं, गर्भस्थानावलुम्पनात् । अतो वयं मर्त्या मध्यमं पदं सर्वभूतान्तर्गतं पद्यते गम्यते तदुपासकैरिति पदं आत्मानं संश्लेष्यामहे ॥ २८ ॥
नैवं भविष्यतीति वदतः अत्र ब्रूमः—
ऐकाश्रम्यं त्वाचार्या अप्रजननत्वादितरेषाम् ॥ २९ ॥
अनु०— किन्तु आचार्यों का कथन है कि केवल एक आश्रम ही है, क्योंकि अन्य आश्रमों में पुत्रोत्पत्ति नहीं होती ॥ २९ ॥
टि०— यहाँ कुछ आचार्यों के इस मत का उल्लेख किया गया है कि आश्रम मुख्यतः एक ही है, गृहस्थाश्रम। इसका मुख्य कारण यह है कि सन्तान की उत्पत्ति केवल उसी आश्रम में होती है। इस सन्दर्भ में गोविन्दस्वामी ने धर्मस्कन्धश्रुति का वचन उद्धृत किया गया है। इस प्रकार गृहस्थाश्रम के मुख्य होने पर केवल एक ही आश्रम का साधन करना चाहिए। अन्य आश्रमों के विषय में विशेषतः उनकी उत्पत्ति का उल्लेख करते हुए, इनके अल्प महत्त्व का संकेत किया गया है।
तुशब्दः पक्षं व्यावर्तयति । यदुक्तं 'चतुर्धा भेदमक आहुः' इति तन्न, ऐकाश्रम्यं एकश्चाऽसावाश्रमश्च तद्भाव ऐकाश्रम्यम् । तच्च गार्हस्थ्ये। नैव पारिव्राज्यादीनामन्यतम इत्याचार्यो मन्यते स्म । कुतः ? अप्रजननत्वादितरेषां पारिव्राज्यादीनाम् । प्रत्यक्षश्रुतिविधानाच्च गार्हस्थ्यस्य 'प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः'