भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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वद्यन्नाह: हाhas a right stem. Look atवरुणायानुब्रूहीति॑: व-रु-णा-या-नु-ब्रू-ही-ति॑! Wait, is there an avagraha ? Look between याandनु: there is no avagraha! It is वरुणायानुब्रूहीति॑(varuṇāyānubrūhīti, sandhi of varuṇāya + anubrūhi + iti)! Wait, why does L7-8 have:मरुद्भ्यो / ऽनुब्रूहीति॑? Because मरुद्भ्यः->मरुद्भ्यो ऽनुब्रूहीति॑! And वरुणाय(dative singular) +अनुब्रूहि->वरुणायानुब्रूहीति॑! Of course! Dative of मरुत् is मरुद्भ्यः (plural), sandhi gives मरुद्भ्यो ऽनुब्रूहि. Dative of वरुण is वरुणाय (singular), sandhi gives वरुणाय + अनुब्रूहि = वरुणायानुब्रूहि! Grammatically perfect: वरुणायानुब्रूहीति॑`!

L12 end: शमीपर्णकरी- L13: `रसक्तूनामिचाया३ इत्यवद्यति॑ द्वितीयेनावदानेन