भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 310, कुल 774 में से

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ऽहमस्मि यो ऽहमस्मि स त्वं नाकमारोह सह यजमानेन षाकमित्यथ गुल्मुष्टिमादाय दध्ना मधुमिश्रेणावोक्षत्यस्कान्च्यौः पृथिवीमस्कान्वृषभो युवा गाः। स्कन्नेमा विश्वा भुवना स्कन्नो यज्ञः प्रजनयतु । अस्कानजनि प्राजनि । आ स्कन्नाज्जायते ५ वृषा । स्कन्नात्प्रजनिषीमहीत्यथ प्रस्तोतारमाह प्रस्तोतर्वाशी- ष्टरꣳ साम गायेष्टाहोत्रैयं चेति' ¹ स यो बलवाꣳस्तमाह्नाने- नोदकुम्भेन संततया धारया त्रिः प्रदक्षिणं परिषिञ्चन्परीहीति' ¹ स तथा करोति' ¹ परिषिच्यमाने यजमानं गन्धर्वयजूꣳषि वाचयति रन्तिर्नामासि दिव्यो गन्धर्व इति प्रतिपद्येन्द्रो दक्षं १० परिजानादह्रीनमित्यातो' ¹ निधाय कुम्भं यथेतं त्रिः पुनः प्रतिपर्यत्यैत्यैनमुपतिष्ठत

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