भारतकोश
बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 122 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 13

बावन कसनी ( कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई ) 11

गगनमण्डल से उतरे, साहिब पुरुष कबीर। चोला धरा खवास का, तोड़े यम जंजीर ।। दास गरीब कबीर को चेरा। सत्य लोक अमर पुर डेरा। अमृत पान अमिय रस चोखा। पीवे हंसा नाहीं धोखा।। अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड में, बंदी छोड़ कहाय। सो तो पुरुष कबीर है, जननी जना न माय।। साहिब पुरुष कबीर ने, देह धरी न कोय। शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय ।। –गरीब दास जी

स्वामी! जौ तुम गवौ सो हौं गाऊँ, तुम्हारा ज्ञान विचारूँ। कहें रैदास सुणों हो स्वामी, भर्म कर्म सब छाडूूँ।। –रविदास जी

पानी ते पैदा नहीं, श्वासा नहीं शरीर। अन्न अहार करता नहीं, ताको नाम कबीर ।। –नाभा दास जी

मेरे कन्त कबीर है, वर और नहिं वरिहों। दादू तीन तिलाक है, चित और न धरिहौं ।। –दादू दयाल जी

कक्का केवल नाम है, बब्बा वरण शरीर। रर्रा सब में रमि रहा, जिसका नाम कबीर ।। सोई ज्ञानी पुरुष है, सतगुरु सत्य कबीर। रज वीरज पैदा नहीं, सुआसा नहीं शरीर ।।