भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

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चिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । ११७९

हल्दी, दारुहल्दी, मुलहठी, दाख और देवदारु इन सबको बकरीके दूधके साथ पीसकर आँखोंमें आँजनेसे अभिष्यन्द (नेत्रोंका दुखना) रोग दूर होता है ॥

गैरिकं सैन्धवं कृष्णा तगरं च यथोत्तरम् । पिष्टं द्विरंशतोऽद्विर्वा गुडिकाऽञ्जनमिष्यते ॥ १८ ॥

गेरू एक माशा, सैंधानोन दो मासे, पीपल चार मासे और तगर आठ माशे इनको एकत्र बकरीके दूधमें अथवा जलमें पीसकर गोली बनालेवे । उस गोलीकों घिसकर आँखोंमें लगानेसे नेत्ररोगमें शीघ्र लाभ होता है ॥ १८ ॥

प्रपौण्डरीकयष्ट्याह्न निशामलकपद्मकैः । शीतैर्मधुसमायुक्तैः सेकः पित्ताक्षिरोगनुत् ॥ १९ ॥

पुण्डरिया, मुलहठी, हल्दी, आमले और पद्माख इनके शीतल क्वाथमें मधु मिश्रित कर नेत्रोंपर सेचन करनेसे पित्तज नेत्ररोग नष्ट होता है ॥ १९ ॥

द्राक्षामधुकमञ्जिष्ठाजीवनीयैः शृतं पयः । प्रातराश्च्योतनं शस्तं शोथशूलाक्षिरोगिणाम् ॥ २० ॥

दाख, मुलहठी, मंजीठ और जीवनीयगणकी समस्त औषधि इन सबके साथ यथानियम दूधको पकाकर प्रातःसमय उससे नेत्रोंको सिञ्चन करे । इससे नेत्रोंकी सूजन और शूल नष्ट होता है ॥ २० ॥

निम्बस्य पत्रैः परिलिप्य लोध्रं स्वेद्याग्निना चूर्णमथापि कल्कम् । आश्च्योतनं मानुषदुग्धयुक्तं पित्तास्रवातापहमुग्रमुक्तम् ॥ २१ ॥

नीमके पत्तोंको पीसकर उसका गोलासा बनाले, उस गोलेमें लोधका चूर्ण भरकर और उसको केलेके पत्तोंसे लपेटकर प्रज्वलित अग्निमें पकावे । फिर कुछ देरके बाद निकालकर उसमें स्त्रीका दूध मिलाकर तरल करके उसको वस्त्रमें छान लेवे । इसको नेत्रोंमें टपकानेसे रक्तपित्त और चक्षुरोग शमन होता है ॥ २१ ॥

कफजे लङ्घनं स्वेदो नस्यं तिक्तान्नभोजनम् । तीक्ष्णैः प्रधमनं कुर्यात्तीक्ष्णैश्चैवोपनाहनम् ॥ २२ ॥

कफजनित चक्षुरोगमें लंघन, स्वेद, नस्य, तिक्तरसवाले अन्नोंका भोजन एवं तीक्ष्ण द्रव्योंसे प्रधमन (नलद्वारा फूँकना) और तीक्ष्ण द्रव्योंका प्रलेप करना उपयोगी है ॥ २२ ॥

फणिज्झकास्फोतकपित्थबिल्वपत्तरपीलूसुरसार्जभङ्गैः । स्वेदं विदध्यादथवा प्रलेपं बर्हिष्ठशुण्ठीसुरदारुकुष्ठैः ॥ २३ ॥

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