भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
पृष्ठ 1326, कुल 1416 में से
संदर्भ में पढ़ें| १२९४ | भैषज्यरत्नावली । | [ बालरोग- |
|---|
क्षीरादस्य शिशोरामं शुष्कं दृष्ट्वा तु दारुणम् ।
माषयूषं पिबेद्धात्री पिप्पलीचूर्णसंयुतम् ॥ २३ ॥
दूधको पीनेवाले बालकके दस्तोंके साथ २ दारुण सूखीआम निकलती मालूम हो तो उसकी धायको पीपलका चूर्ण डालकर उडदोंका यूष पान करावे ॥२३॥
स्तन्यपस्य कुमारस्य सर्वस्यामातिसारिणः ।
धात्रीं विलङ्घयेद्धीमान् देहदोषाद्यपेक्षया ॥
पञ्चकोलसिद्धं वा पेयादिं च प्रयोजयेत् ॥ २४ ॥
दूध पीनेवाले बालकके आमसहित दस्त होते हों तो उसकी धायको लंघन करावे । अथवा पञ्चकोलके द्वारा सिद्धकर पेया पान करनेको देवे ॥ २४ ॥
वचा मुस्तं भद्रदारुनागरातिविषागणः ।
हरिद्राद्वययष्ट्याह्वसिंहीशक्रयवैः कृतः ॥ २५ ॥
एतौ वचाहरिद्रादिगणौ स्तन्यविशोधनौ ।
आमातिसारशमनौ कफमेदोविशोषणौ ॥
मात्रा क्वाथजलं पेयं किञ्चिद्देयं शिशोरपि ॥ २६ ॥
वच, भद्रमोथा, देवदारु, सोंठ और अतीस इन औषधियोंके समुदायको वचादि-गण कहते हैं । एवं हल्दी, दारुहल्दी, मुलहठी, कटेरी और इन्द्रजौ इनके समूहको हरिद्रादिगण कहते हैं । इन दोनों गणोंका क्वाथ स्तन्यविशोधक, आमातीसारनाशक तथा कफ और मेदको शुष्क करनेवाला है । उक्त गणोंका क्वाथ धायको पान करावे और बालकको भी कुछ थोडासा देवे ॥२५॥२६॥
बिल्वं च पुष्पाणि च धातकीनां जलं सलोध्रं गजपिप्पली च ।
क्वाथावलेहौ मधुना विमिश्रौ बालेषु योज्यावतिसारितेषु ॥ २७ ॥
बेलगिरी, धायके फूल, सुगन्धवाला, लोध और गजपीपल इनका क्वाथ या चूर्ण शहदमें मिलाकर बालकको सेवन करानेसे अतीसाररोग नष्ट होता है ॥ २७ ॥
आम्रातकाम्रजम्बूनां त्वचमादाय चूर्णयेत् ।
मधुना लेहयेद्बालमतीसारविनाशनम् ॥ २८ ॥
अम्बाडेकी छाल, आमकी छाल और जामुनकी छाल इनको एकत्र पीसकर और शहदमें मिलाकर बालकको चटावे तो दस्त होने बन्द होते हैं ॥ २८ ॥