भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

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चिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । १३०१

नागरमोथा, अतीस; साँठ, सुगन्धवाला और इन्द्रजौ इनका क्वाथ प्रातःकाल बालकको सेवन करानेसे सर्वप्रकार अतीसाररोग नाश होता है ॥ ६५ ॥

हरिद्रादि ।

हरिद्राद्वययष्ट्याह्वसिंहीशक्रयवैः कृतः ।
शिशोर्ज्वरातिसारघ्नः कषायः स्तन्यदोषजित् ॥ ६६ ॥

हल्दी, दारुहल्दी, मुलहठी, कटेरी और इन्द्रजौ इनके कल्कद्वारा क्वाथ बनाकर बालककी माता अथवा धायको पान करानेसे ज्वर, अतीसार और स्तन्यदोष दूर होता है ॥ ६६ ॥

भद्रमुस्तादि ।

भद्रमुस्ताभयानिम्बपटोलमधुकैः कृतः ।
क्वाथः कोष्णः शिशोरेष निश्शेषज्वरनाशनः ॥ ६७ ॥

भद्रमोथा, हरड, नीमकी छाल, पटोलपात और मुलहठी इन औषधियोंका मन्दोष्ण क्वाथ बालकको सेवन करावे तो यह समग्रज्वरको नष्ट करता है ॥ ६७॥

समङ्गादि ।

समङ्गाधातकीलोध्रसारिवाभिः शृतं जलम् ।
दुर्द्धरेऽपि शिशोर्देयमतीसारे समाक्षिकम् ॥ ६८ ॥

वराहक्रान्ता, धायके फूल, लोध और अनन्तमूल इनके द्वारा बनाया हुआ क्वाथ शहदके साथ मिलाकर दुर्द्धर अतीसारमें बालकको देना चाहिये ॥ ६८ ॥

नागरादि ।

नागरातिविषामुस्तबालकेन्द्रयवैः कृतम् ।
कुमारं पाययेत्प्रातः सर्वातीसारनाशनम् ॥ ६९ ॥

सोंठ, अतीस, नागरमोथा, सुगन्धवाला और इन्द्रजौ इनका क्वाथ बनाकर सुहाता २ प्रातःसमय बालकको पान करावे तो सर्वप्रकारके दस्त बन्द होते हैं ॥ ६९॥

बिल्वादि ।

बिल्वचूतकषायेण लाजांश्चैव सशर्करान् ।
आलोड्य पाययेद्बालं छर्द्यतीसारनाशनम् ॥ ७० ॥

बेलगिरी और आमकी छाल: इनके काढ़ेमें खीलोंका चूर्ण और खाँड डालकर सबको एकमएक करके बालकको सेवन करानेसे कै, दस्त दूर होते हैं ॥ ७० ॥