भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३३४ | भैषज्यरत्नावली । | [ वाजीकरणा-
शतावरको १ तोला ले ८ तोले दूध और ३२ तोले जलमें पकावे । जब पकते २ दूधमात्र शेष रहजाय तब उसको उतारकर शीतल करके मिश्री डालकर पान करे तो इससे अत्यन्त स्त्रीप्रसङ्ग करनेवाले मनुष्यकी इन्द्रिय शिथिल नहीं होती ॥ १७ ॥
वृद्धशाल्मलिमूलस्य रसं शर्करया समम् ।
प्रयोगादस्य सप्ताहाज्जायते रेतसोऽम्बुधिः ॥ १८ ॥
पुराने सेमलके वृक्षकी जडके रसको चीनी मिलाकर ७ दिनतक सेवन करनेसे वीर्यकी जलके समान वृद्धि होती है ॥ १८ ॥
लघुशाल्मलिमूलेन तालमूलीं सुचूर्णिताम् ।
सर्पिषा पयसा पीते रतौ चटकवद्भवेत् ॥ १९ ॥
छोटे छोटे सेमलके पौधोंकी जडका चूर्ण और मुसली इन दोनोंको समान भाग ले एकत्र कूटपीसकर घृत और दूधके साथ पान करनेसे चिरौंटेके समान रतिशक्ति बढती है ॥ १९ ॥
विदारीकन्दचूर्णं च घृतेन पयसा पिबेत् ।
उडुम्बररसेनैव वृद्धोऽपि तरुणायते ॥ २० ॥
विदारीकन्दके चूर्णको घी, दूध और गूलरके रसके साथ मिलाकर सेवन करनेसे वृद्ध मनुष्य भी तरुण होता है ॥ २० ॥
सप्तधाऽऽमलकीचूर्णमामलक्यम्बुभावितम् ।
घृतेन मधुना लीढ्वा पिबेत्क्षीरपलं नरः ॥ २१ ॥
आमलॉके चूर्णको आमलोंकेही रसमें सात बार भावना देकर घृत और मधुके साथ प्रतिदिन भक्षण करे और पीछेसे ४ तोले गोदुग्ध पीवे तो कामशक्ति बढती है ॥ २१ ॥
अत्यन्तमुष्णकटुतिक्तकषायमम्लं क्षारं च शाकमथवा लवणाधिकं च ।
कामी सदैव रतिमान्वनिताभिलाषी नो भक्षयेदिति समस्तजनप्रसिद्धिः ॥ २२ ॥
अत्यन्त गरम, चरपरे, तीखे, कषैले, खट्टे और क्षाररसवाले पदार्थ, शाक अथवा अधिक परिमाणमें लवण इन पदार्थोंको कामी पुरुष कदापि सेवन न करे । क्योंकि ये सब रतिशक्तिका ह्रास करनेवाले हैं ॥ २२ ॥