भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

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( १८ ) भैषज्यरत्नावली-

विषय.पृष्ठ.विषय.पृष्ठ.
महारोहीतकघृत... ९४१रास्त्रादि, त्रिकट्त्वादि... ९७२
रोहितकारिष्ट... ९४२विल्वादिचूर्ण, भक्तोत्तरीयचूर्ण... ९७३
शोथकी चिकित्सा९४३शशिशेखररस, वातारिरस... ९७४
सिंहास्यादि, पटोलादि, त्रिफलादि९४५वृद्धिबाधिकावटी, रसराजेन्द्र... ९७५
पथ्यादि, पुनर्नवाष्टक... "शतपुष्पाद्यघृत... ९७६
शुण्ठी-पुनर्नवादि... "त्रिवृतादिघृत, वह्नदंतीघृत... ९७७
पुनर्नवा-दशक, पुनर्नवापुटस्वेद... ९४६गन्धर्वहस्तकतैल... ९७८
पुनर्नवादिचूर्ण... "वृद्धिरोगमें पथ्य, वृद्धिरोगमेंअपथ्य९७९
शोथारिचूर्ण, पुनर्नवादिलेह... ९४७गलगण्डादिकी चिकित्सा ।
त्रिनेत्राख्यरस... "गण्डमालाकी चिकित्सा९८१
त्रिकट्वादिलौह, शोथारिलौह... ९४८अपचीकी चिकित्सा९८३
शोथांकुशरस... "ग्रन्थिकी चिकित्सा९८४
पञ्चामृतरस, शोथकालानलरस... ९४९अर्बुदकी चिकित्सा९८५
क्षेत्रपालरस... ९५०रौद्ररस, काञ्चनारगुटिका... ९८८
कल्पलतावटी, दुग्धवटी १-३... ९५१काञ्चनारगुग्गुलु, सिन्दूरादितैल... ९८९
तक्रवटी, दधिवटी... ९५३तुम्बीतैल, अमृतातैल, छुछुंदरीतैल९९०
शोथभस्मलौह... ९५४शाखोटकतैल, बिम्बादितैल, निर्गुण्डीतैल"
सुधानिधि... ९५५व्योषाद्यतैल, चन्दनाद्यतैल, गुञ्जाद्यतैल९९१
अग्निमुखमण्डूर, शोथारिमण्डूर... ९५६गलगण्डादिरोगोंपर पथ्य... "
तक्रमण्डूर, रसाभ्रमण्डूर... ९५७गलगण्डादिरोगोंपर अपथ्य... ९९२
पुनर्नवादि गुग्गुलु, दशमूलहरीतकी९५९श्लीपदरोगकी चिकित्सा ।
शुण्ठीघृत, स्वल्प पुनर्नवाद्यघृत... ९६०वृद्धदारकचूर्ण पिप्पल्यादिचूर्ण... ९९५
पुनर्नवाद्यघृत१-२, माणकघृत... "श्लीपदारि, श्लीपदगजकेशरी... ९९६
चित्रकाद्यघृत, शुष्कमूलकाद्यतैल९६१नित्यानन्दरस... "
बृहच्छुष्कमूलकाद्यतैल १-२... "कृष्णाद्यमोदक... ९९७
शोथशार्दूल तैल... ९६३सौरेश्वरघृत... ९९८
पुनर्नवाद्यतैल... ९६४विडङ्गादितैल, श्लीपदरोगमेंपथ्य... ९९९
शैलेयाद्यतैल, समुद्रशोषाद्यतैल... ९६५श्लीपदरोगमें अपथ्य... "
पुनर्नवाद्यरिष्ट... ९६६विद्रधिकी चिकित्सा१०००
शोथमें पथ्य... ९६७वरुणादिघृत, विद्रधिरोगमें पथ्य१००२
शोथमें अपथ्य... ९६८विद्रधिरोगमें अपथ्य१००३
वृद्धिरोगकी चिकित्सा ।
वध्न लक्षण... ९७०