भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम् ] भाषार्टीकासहिता । ६१
चित्तविभ्रमसन्निपातज्वरकी चिकित्सा ।
मृद्धीकादि ।
मृद्धीकामरदारुमत्स्यशकलामुस्तामलक्यामृताः
पथ्यारेवतरामसेनकरजोराजीफलैः संयुताः ।
हन्युश्चित्तरुजोऽथ दर्दुरपलापाठापटोलीपयः-
पथ्यापर्पटकराजवृक्षकटुकाशम्बूकपुष्प्यः शृताः ॥२७॥
दाख, देवदारु, कुटकी, नागरमोथा, आमले, गिलोय, हरड, अमलतास, चिरायता, पित्तपापड़ा, और परवल इन सबका बनाया हुआ क्वाथ अथवा ब्राह्मी, पाठ, पटोलपात, सुगन्धवाला, हरड, पित्तपापड़ा, अमलतास, कुटकी और शंखपुष्पी इन सब ओषधियोंका बनाया हुआ, क्वाथ पान करनेसे चित्तभ्रमयुक्त सन्निपातज्वर दूर होता है ॥ २७ ॥
कर्णकसन्निपातज्वरकी चिकित्सा ।
भार्ङ्ग्यादि ।
भार्ङ्गीजयापौष्करकण्टकारी-
कटुत्रिकोग्राघनकुण्डलीभिः ।
कुलीरशृङ्गीकटुकारसाभिः
कृतः कषायः किल कर्णकघ्नः ॥ २८ ॥
भारंगी, अरणी, पोंहकरमूल, कटेरी, सोंठ, मिरच, पीपल, बच, नागरमोथा, गिलोय, काकड़ासिंगी, कुटकी और रास्ना इन ओषधियोंका बनाया हुआ क्वार्थ कर्णकसंनिपातज्वरको अवश्य नष्ट करता है ॥ २८ ॥
कण्ठकुब्जसन्निपातज्वरकी चिकित्सा ।
त्र्यूषणादि क्वाथ ।
त्र्यूषणफलत्रिकमुस्तकट्वी-
कलिङ्गसिंहाननशर्वरीभिः ।
क्वाथः कृतः कृन्तति कण्ठकुब्जं
कण्ठीरवः कुब्जकमाशु तद्वत् ॥ २९ ॥
हरड, बहेडा, आमला, सोंठ, मिरच, पीपल, नागरमोथा, कुटकी, इन्द्रजौ, अडूसा और हल्दी इन ओषधियोंका काढा बनाकर सेवन करनेसे कण्ठकुब्ज सन्निपातज्वर शीघ्र नष्ट होता है ॥ २९ ॥