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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 380 में से

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प्रेम के उद्दीपन [ १८५

अपने साथियों को भेजता और श्रीकृष्ण उन्हें मारकर अपना पराक्रम प्रकट करते। श्रीकृष्ण का परिधान एवं माला सामान्यतः श्रीकृष्ण के विग्रह पर चार प्रकार के परिधान रहते हैं-- कुर्ता, धोती, पगड़ी और दुपट्टा। वृन्दावन में वे सदा रक्तवर्ण दुपट्टा, पीतवर्ण कुर्ता और सिर पर केसर रंग की पगड़ी धारण करते हैं। नाना प्रकार की धोती उनकी मधुर मुस्कान से मिल कर सखाओं का आनन्द बढ़ाती थी। श्रीकृष्ण की इस वेषभूषा को भूयिष्ठ (भ्राजमान्) कहा गया है। जैसे नाना वर्ण के वस्त्र में गजशिशु शोभित होता है, वैसे ही श्रीकृष्ण के शरीर के अंगों पर वर्ण-वर्ण के वस्त्र भ्राजमान् थे। श्रीकृष्ण के केशबन्धन, अंगराग के आलेप, माला, तिलक, चित्र, पान तथा लीलाकमल को 'आकल्प' कहते हैं। श्रीकृष्ण इस सम्पूर्ण आकल्प से निरन्तर विभूषित हैं। श्रीकृष्ण के केश-विन्यास के भी बहुत भेद हैं; कभी वे सिर के मध्य भाग में पुष्प धारण करते हैं तो कभी पृष्ठभाग में। समय-समय पर उनकी केशराशि के भिन्न-भिन्न शृंगार होते हैं। श्रीकृष्ण के अंग पर आलिप्त अंगराग सामान्यतः शुभ्र (श्वेत) वर्ण का होता है, पर केसर के संयोग से पीतवर्ण हो जाता है। श्रीकृष्ण कण्ठ में वैजयन्ती माला धारण करते हैं। वैजयन्ती में कम से कम पाँच रंग के फूल गुम्फित रहते हैं। यह सदा श्रीकृष्ण के जानुओं अथवा चरणों का स्पर्श करती रहती है। इसके अतिरिक्त अन्य अनेक पुष्पमालाएँ भी उनके सिर, कण्ठ, वक्षस्थल आदि पर शोभित रहती हैं। अंगराग और सवर्ण चन्दन के बने कलापूर्ण चित्र भी श्रीकृष्ण के विग्रह पर पाए जाते हैं। एक गोपी सखी से श्रीकृष्ण की रूप माधुरी का गुणगान कर रही थी। उनका श्यामल वर्ण, पान की अरुणिमा से शतगुणित हुई शोभा, सिर पर कुंचित केशराशि, शरीर पर कुंकुम के बिन्दु तथा ललाट पर तिलक— ये सब परम मनोहारी हैं। किरीट, कुण्डल, हार, चार परिधान, कड़े, अंगूठी, नूपुर तथा वेणु—ये सब श्रीकृष्ण के नाना अलंकार हैं। अघासुर के अरि श्रीकृष्ण अपने अनुपम किरीट, हीरे के कुण्डल, मोतियों के हार, कड़े, कसीदे के वस्त्रों और सुन्दर अंगूठियों को धारण किए हुए हैं। श्रीकृष्ण को वनमाली भी कहा जाता है, क्योंकि वे नाना पुष्पों से