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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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अन्य व्यभिचारिभाव [ २३३ भाव-विकारों को रोकने में उसी प्रकार असमर्थ हो जाता है, जिस प्रकार चन्द्रमा के उदय होने पर समुद्र अपने विकारों को रोक नहीं पाता। समुद्र स्वाभाविक रूप में निरन्तर गम्भीर और अचल बना रहता है; परन्तु जब चन्द्रोदय होता है तो समुद्र के वेग को कोई नहीं रोक सकता। इसी प्रकार जो शुद्धभक्त हैं, वे किसी भी कारण से अपने आन्तरिक भावविकारों को नहीं दबा सकते।

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