भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसख्यरस में प्रेम के व्यवहार [ २८६
वाले भक्तजन आज भी इन वनों की शोभा का आस्वादन कर सकते हैं। श्रीकृष्ण के अप्रतिम सुन्दर रूप को देखकर एक भक्त अपने सखा से कहने लगा, “हे मित्र ! तनिक श्रीकृष्ण की ओर तो देखो। आज वे दोनों ओर सोने से मढ़ी हाथ की लाठी धारण किये हुए हैं और चमकते सुनहरी रेशमी वस्त्र की पगड़ी पहने हुए उनकी वेशभूषा सखाओं को परम आह्लादित कर रही है।” पौगण्ड की शेष अवस्था में श्रीकृष्ण की केशराशि कभी नितम्बों तक लटकने लगती है और कभी इधर-उधर बिखर जाती है। इस अवस्था में उनके दोनों कंधे ऊँचे और चौड़े होते हैं और मुखमण्डल निरन्तर तिलक के चिह्न से सुशोभित रहता है। उनके कंधों पर बिखरे बालों को देखकर लगता है मानो श्रीदेवी उनका आलिंगन कर रही है। इस आलिंगन का इनके सखा खूब आनन्द लेते हैं। सुबल ने एक बार उनसे कहा था, “हे केशव ! तुम्हारी गोल-गोल पगड़ी, हाथ में पकड़ा हुआ कमल, ललाट पर तिलक की सीधी रेखा, कुंकुम मिश्रित सुगन्ध और सुन्दर वेष मुझे भी परास्त देने वाला है, यद्यपि मैं तुम और तुम्हारे सखाओं से पराक्रमी हूँ। फिर स्वभाव से ही सरल-मृदु गोपांगनाओं की क्या दशा होगी ?” इस अवस्था में श्रीकृष्ण अपने सखाओं के कानों में धीरे-धीरे बोलने में आनन्द लेते हैं और उनकी वार्ता का विषय होता है—गोपियों का सौन्दर्य, जो सामने खड़े-खड़े उन्हें निहारा करती हैं। सुबल ने एक बार श्रीकृष्ण से कहा, “अरे धूर्त ! तू बड़ा चतुर है। तू दूसरों के मन की जान लेता है, इसलिए मैं तेरे कान में कहता हूँ कि सब गोपियों में ये जो पाँच सबसे अधिक सुन्दर हैं, ये तेरी वेश-भूषा पर मोहित हो गई हैं। लगता है कन्दर्प ने उन्हें तुझे परास्त करने में नियुक्त किया है।' भाव यह है कि यद्यपि श्रीकृष्ण त्रिभुवनविजयी हैं, पर गोपियों का सौन्दर्य श्रीकृष्ण को जीत सकता है। कैशोर वय के लक्षणों का वर्णन पहले हो चुका है। यही वह अवस्था है जब भक्त श्रीकृष्ण का सबसे अधिक आस्वादन कर सकते हैं। श्रीकृष्ण की राधारानी के साथ किशोर-किशोरी के रूप में आराधना की जाती है। श्रीकृष्ण की वय इस कैशोर से आगे नहीं बढ़ती। ब्रह्मसंहिता' में प्रमाण हैं कि यद्यपि वे पुराणपुरुष हैं और अनन्त रूपधारी हैं फिर भी उनका मूल रूप नित्य यौवन है। जब भी हम कुरुक्षेत्र के युद्ध में श्रीकृष्ण का कोई चित्र देखते हैं तो उन्हें किशोर ही पाते हैं, यद्यपि उस समय तक उनके