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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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रसों की मैत्री वैर स्थिति [ ३३६ बड़ी से बड़ी सुन्दरी स्त्री में भी सारी रुचि जाती रहेगी।" इस वाक्य में शांत रस अंगी है और वीभत्सरस अंगरस है । एक भक्त ने दृढ़तापूर्वक कहा, "प्रभो ! अब मेरा मुख इन युवतियों का संग प्राप्त होने पर युवतियों के संग के विचार से एकदम मुड़ जाता है। जहाँ तक ब्रह्मसाक्षात्कार का सम्बन्ध है, आपके चिन्तन में मग्न होने से मेरी उसमें कुछ भी रुचि नहीं रही है। इस दिव्य आनन्द में मेरे चित्त में कोई वासना भी शेष नहीं रही है। यहाँ तक कि मैं अब योगसिद्धि भी नहीं चाहता। मेरा मन तो केवल आपके चरणकमलों की आराधना की ओर आकृष्ट हो रहा है।" इस वाक्य में शान्तरस अंगी है और वीररस अंगरस है। एक अन्य वाक्य में सुबल का इस प्रकार से सम्बोधन है, "हे सुबल ! जिन्हें मोरमुकुटधारी श्रीकृष्ण के अधरामृत के पान का अवसर मिला है वे ये व्रजांगनाएँ त्रिभुवन में परम धन्यातिधन्य हैं।" इस दृष्टान्त में सख्यरस अंगी है और माधर्यरस अंग है। श्रीकृष्ण गोपियों से कहते हैं, "हे ललनाओ ! इस प्रकार लालसाभरे नेत्रों से मेरी ओर न देखो। सन्तोष करके वृन्दावन में अपने-अपने घरों को लौट जाओ। तुम्हारे यहाँ खड़े रहने की कोई आवश्यकता नहीं है।" जिस समय श्रीकृष्ण गोपियों से इस प्रकार परिहास कर रहे थे, जो बड़ी उत्कंठा के साथ उनसे रासलीला का आनन्द लेने आई थीं, तो वहाँ उप- स्थित सुबल श्रीकृष्ण की ओर हँसते हुए बड़ी-बड़ी आँखों से देखने लगा। सुबल की अनुभूति में सख्य और हास्यरस का मिश्रण था, यहाँ सख्य अंगी है और हास्य उसका अंग है। निम्नलिखित उदाहरण में सख्यरस और हास्यरस क्रमशः अंगी और अंगरस हैं। जब श्रीकृष्ण ने सुबल को राधारानी की वेशभूषा में यमुना तट पर अशोक वृक्ष के नीचे चुपचाप छिपे हुए देखा तो वे एकदम आश्चर्य से अपने आसन को छोड़कर उठ बैठे। श्रीकृष्ण को देखकर सुबल ने अपने कपोलों को छुपाकर अपनी हँसी रोकने का प्रयास किया। वत्सलरस और करुणरस के मिश्रण का भी उदाहरण है--जब यशोदा मैया को यह विचार हुआ कि उनका पुत्र वन में छाते के बिना नंगे पाँव विचर रहा होगा तो कृष्ण को कितना कष्ट हो रहा होगा, यह सोचकर अत्यन्त व्यथित हो उठीं। यह अंगी वत्सलरस और अंग करुण- रस के मिश्रण का उदाहरण है। वत्सलरस और हास्य के मिश्रण का उदाहरण इस प्रकार है।