भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभक्तियोग सब मोक्षों से बढ़कर है [ ४३ के अनुकूल होने पर अन्य चारों मुक्तियों को तो कदाचित् ले भी सकते हैं, पर सायुज्य को कभी नहीं लेते । भगवान् के नाना प्रकार के भक्तों में वह सर्वोत्तम माना जाता है, जो वृन्दावन में प्रकट श्रीकृष्ण के आदिरूप पर मोहित रहता है। ऐसा भक्त वैकुण्ठलोक और श्रीकृष्ण की दिव्य नगरी द्वारका तक के ऐश्वर्य की ओर आकृष्ट नहीं होता । अस्तु, श्रील रूप गोस्वामी का निर्णय है कि भगवान् की गोकुल अथवा वृन्दावन* की लीला पर आकृष्ट भक्त सर्वश्रेष्ठ हैं। भक्त भगवान् के इष्ट रूप में अनन्य रहता है। उदाहरण के लिए, रामभक्त हनुमान् जी जानते थे कि भगवान् राम और भगवान् नारायण में भेद नहीं है। फिर भी, वे केवल भगवान् राम की सेवा के ही अभिलाषी थे। इसका कारण भक्त की विशिष्ट रुचि है। भगवत्-रूप बहुत से हैं, परन्तु कृष्ण आदिरूप है। यद्यपि सभी भगवत्-रूपों के भक्त एक श्रेणी में हैं, फिर भी सब प्रकार के भक्तों में कृष्णभक्त सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- वृन्दावन वह दिव्य धाम है, जहाँ श्रीकृष्ण अपने शैशवकालीन लीला- रस का परिवेषण करते हैं। यह परमधाम है। जब यह प्राकृत-जगत् में प्रकट होता है तो इसे गोकुल कहते हैं; वैकुण्ठ-जगत् में यही गोलोक या गोलोक-वृन्दावन कहलाता है।