भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ ] भक्तिरसामृतसिन्धु
सार्वभौम विधान किया है; परम अकिंचन मनुष्य भी इसका पालन कर सकता है । परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि वैभवपूर्ण अर्चन करने में समर्थ पुरुष भी भगवान् को केवल जल और पत्र-पुष्प से तुष्ट करे। वैभव के अनुसार सुन्दर आभूषणों, पुष्पों, नैवेद्यों का अर्पण करना चाहिए। ऐसा नहीं कि भगवान् को तो जल और पत्र-पुष्प से प्रसन्न करे और सारे धन का अपनी इन्द्रियतृप्ति में व्यय करे); २५. श्रीकृष्ण को अर्पण किए बिना कुछ न खाय; २६. ऋतु के फल और अन्न का श्रीकृष्ण को निवेदन करना न भूले; २७. भोजन का भोग लगाने से पूर्व किसी को भी न खिलाये; २८. मूर्ति की ओर पीठ न करे; २६. गुरु को प्रणाम चुपचाप न करे, अर्थात् प्रणाम करते हुए गुरु-प्रणति का उच्च स्वर से पाठ करे; ३०. गुरु के सांनिध्य में स्तवपाठ करना न भूले; ३१. गुरु के आगे आत्मप्रशंसा न करे; ३२. मूर्ति के समक्ष देवनिन्दा न करे । यह ३२ अपराधों की सूची है इनके अतिरिक्त 'वराहपुराण' में कुछ अन्य अपराधों का उल्लेख है : १. अन्धकार में मूर्ति का स्पर्श न करे; २. मूर्ति-अर्चन के विधि-विधान के दृढ़ पालन में प्रमाद न करे; ३. ध्वनि किए बिना मन्दिर में प्रविष्ट न हो; ४. कुत्ते आदि अधम पशुओं की दृष्टि से दूषित पदार्थ भगवान् को अर्पित न करे; ५. आराधना के काल में मौनभंग न करे; ६. पूजन करते हुए मूत्रपुरीषोत्सर्ग न करे; ७. पुष्प का अर्पण किए बिना धूप न दिखाना; ८. गन्धरहित पुष्पों को अर्पित न करना; ६. प्रतिदिन अच्छी प्रकार से दन्तधावन करना; १०. मैथुन के बाद तत्काल मन्दिर में प्रवेश न करना; ११. रजस्वला स्त्री का स्पर्श न करना; १२. मृतदेह का स्पर्श करके मन्दिर में प्रवेश न करना; १३. लाल, नीले, अस्वच्छ वस्त्रों को धारण किए हुए मन्दिर में न जाना; १४, मृतदेह का दर्शन करके मन्दिर में न जाना; १५. मन्दिर में अधोवायु न छोड़ना; १६. मन्दिर में क्रोध न करना; १७. श्मशान जाकर मन्दिर में न जाना; १८. मूर्ति के आगे डकार न लेना। जब तक भोजन का पूर्ण पाचन न हो गया हो, मन्दिर में प्रवेश न करे; १६. चरस, गांजा का प्रयोग न करे; २०. अफीम आदि मद्य पदार्थों का सेवन न करे; २१. शरीर पर तेल लगाकर मन्दिर में प्रवेश अथवा मूर्ति का स्पर्श न करे। २२. भगवान् परम ईश्वर हैं— ऐसा प्रतिपादन करने वाले किसी भी शास्त्र का अपमान न करे; २३. किसी विरोधी शास्त्र का प्रवर्तन न करे; २४. मूर्ति के आगे पान न चबाए; २५. अशुद्ध पात्र में रखे पुष्प को न चढ़ाये; २६. आसन के बिना भूमि पर बैठ कर भगवत्-अर्चन न करे; २७. स्नान पूरा करने से पूर्व मूर्ति का स्पर्श