भारतकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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चीरहरण १६१ प्रियतमहृदये वा खेलतु प्रेमरीत्या पदयुगपरिचर्यां प्रेयसी वा विधत्ताम्। विहरतु विदितार्थो निर्विकल्पे समाधौ ननु भजनविधौ वा तुल्यमेतद्द्वयं स्यात्॥ प्रियतमा चाहे प्रेमोद्रेकमें अपने प्रियतमके वक्षःस्थलपर क्रीड़ा करे, चाहे सावधानीसे प्रियतमके पाद-पद्मकी सपर्या (सेवा) करे, उसके लिये सभी ठीक है। वैसे ही तत्त्वनिष्ठ चाहे अभेदभावसे समाधिमें निरत रहे, चाहे भेदभावसे भजनभावमें निरत रहे, उसके लिये दोनों ही शोभा देते हैं। फिर भी रसिकोंका कहना है— विश्वेश्वरोऽपि सुधिया गलितेऽपि भेदे भावेन भक्तिसहितेन समर्चनीयः। प्राणेश्वरश्चतुरया मिलितेऽपि चित्ते चैलाञ्चलव्यवहितेन निरीक्षणीयः॥ भगवान्‌के साथ भक्तका भेदभाव मिट जानेपर भी सुधीजनोंको भेदभावसे ही व्यवहारमें भगवान