भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअब उनकी उत्सुकता और उत्कण्ठा उन्हें क्षण-क्षणको युगके या कल्पके समान प्रतीत कराने लगी। अब एक-एक क्षणका विलम्ब उनके लिये असह्य हो गया। एक-एक क्षणके वियोगजन्य तीव्र तापसे उनके अविद्या, काम, कर्म, हृदय-ग्रन्थि, किं बहुना गुणमय पाँचों कोश जलने लगे और क्षणिक सम्मिलनकल्पनाजन्य लोकोत्तर सुखसे रसमय स्वरूप परिपुष्ट होने लगा। जब यह कार्य पूर्ण हो जायगा, तब रासके लिये वेणुगीतपीयूषसे उनका आकर्षण करके उनके साथ विलासादि रमण होगा। कुछ ऐसी भी व्रजांगनाएँ थीं कि जिनके प्राकृत पंचकोशों और रसात्मक स्वरूपका दाह तबतक भी नहीं हुआ था। जब कृष्णका वेणुनाद सुनकर वे श्रीमद्वृन्दारण्यधामकी ओर चलीं, तब उनके पिता, भ्राता और पति आदिने उन्हें रोककर उन्हें गृहमें बन्द कर दिया। जब वे किसी तरह निकल न सकीं तो वहाँ ही नेत्र मींचकर श्रीकृष्णका ध्यान करने लगीं। दु