भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीकृष्णकी बालक्रीडा २५ हुआ। मूर्तिमती वात्सल्य-रसाधिष्ठात्री महालक्ष्मीके समान तथा चलती-फिरती तेजोमयी मंजरीके समान अपने कुलको यश देनेवाली श्रीयशोदा धन्य है। इस तरह अपने मधुर चरित्रोंसे अमलात्मा परमहंस महामुनीन्द्र आत्मारामोंको भक्तियोगमें लगाने (प्रवृत्त करने)-के लिये और नर-लीला रसकी रचनासे अपने भक्तोंको आनन्दित करनेके लिये श्रीव्रजराजके भवनमें मूर्त्तानन्द श्रीकृष्णचन्द्र प्रकट हुए। मुक्त मुनियोंके अभिलषित परमानन्दसार-सर्वस्व श्रीकृष्ण-फलको श्रीदेवरूपिणी श्रीदेवकीने उत्पन्न किया, श्रीव्रजेन्द्ररोहिणीने उसका प्रकाशन तथा पालन किया और श्रीव्रजांगनाओं एवं तदीय चरणाम्बुजानुरागियोंने उस सुमधुर फलका सम्यक् सम्भोग किया— मुक्तमुनीनां मृग्यं किमपि फलं देवकी फलति। तत्पालयति यशोदा प्रकाममुपभुञ्जते गोप्यः ॥ श्रीगर्गजी