भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished778 पृष्ठ
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की कल्पना है, सदाशिवमें फलककी कल्पना है, निर्विशेष ब्रह्मके आश्रित श्रीकामेश्वरीके श्रीहस्तमें पाश, अंकुश, इक्षु, धनुष और बाण हैं। राग ही पाश है, द्वेष ही अंकुश है, मन ही इक्षु-धनुष है, शब्दादि विषय पुष्पबाण हैं। कहीं इच्छाशक्तिको ही पाश, ज्ञानको ही अंकुश, क्रियाशक्तिको ही धनुष-बाण माना गया है- इच्छाशक्तिमयं पाशमङ्कुशं ज्ञानरूपिणम्। क्रियाशक्तिमये बाणधनुषी दधदुज्ज्वलम्॥ पूजारहस्य नामरूपात्मक जगत्में सच्चिदानन्दकी भावना ही अम्बाको पाद्यसमर्पण है। सूक्ष्मजगत्में ब्रह्मभावना ही अर्घ्यसमर्पण है। भावनाओंमें ब्रह्मभावना ही आचमन है। सर्वत्र सत्त्वादिगुणोंमें चिदानन्दभावना ही स्नान है। चिद्रूपा कामेश्वरीमें वृत्तिविषयताका चिन्तन करना ही प्रोक्षण है। निरञ