भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतुरीय पादको हम प्रणाम करते हैं। आपकी प्राप्तिमें विघ्नकारी पापी, आपकी प्राप्तिमें विघ्नसम्पादन- लक्षण अपने अभीष्टको प्राप्त न करें, इस अभिप्रायसे अथवा जिससे द्वेष हो, उसके प्रति भी अमुक व्यक्ति अमुक अभिप्रेत फलको प्राप्त न करें, मैं अमुक फल पाऊँ, ऐसी भावनासे वह मिल जाता है। गायत्रीका अग्नि ही मुख है। अग्निमुखको न जाननेसे ही एक गायत्रीविद् हाथी बनकर जनकका वाहन बना था। जैसे अग्निमें अधिक-से-अधिक ईंधन समाप्त हो जाता है, वैसे ही अग्निमुख गायत्रीके ज्ञानसे सब पाप समाप्त हो जाते हैं। 'छान्दोग्योपनिषद्' में कहा गया है कि यह सम्पूर्ण चराचर भूत-प्रपंच गायत्री ही है। किस तरह सब कुछ गायत्री है, इसपर कहा गया है कि वाक् ही गायत्री है, वाक् ही समस्त भूतोंका गान एवं रक्षण करती है। 'मा भैषीः' इत्यादि वचनोंसे वाक्-द्वारा ही भयकी निवृत्ति होती है। गायत्रीको पृथ्वीरूप [L