भारतकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished778 पृष्ठ

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'माँ ! जिनके लिये त्याग, बलिदान किया गया, जिनके लिये अगणित दुःख भोगे गये, जिनके हितार्थ कितने ही अनुष्ठान किये गये, जिनके लिये अगणित आँसू बहाये गये, वे सब मेरे रोने-धोनेको सुना- अनसुना, देखा-अनदेखा करके अपने-अपने काममें लग गये। किसको समय है, जो मुझ-जैसे पागलोंके प्रलाप सुने ? माँ ! उस दिन शिप्राके तटपर तुम्हारी स्मृति आयी थी और तुम्हारे चरणोंका स्मरण किया था। तुम्हारे चरणोंमें कुछ अश्रु चढ़ाये गये थे, परंतु पुनः वही विस्मृति छा गयी। फलस्वरूप उपद्रव भी वे ही-के-वे ही वर्तमान हैं। माँ ! तुम्हीं सिद्धि- बुद्धिस्वरूपा गणपतिप्रिया हो। माँ ! तुम्हीं सरस्वतीस्वरूपा विधिप्रिया हो। माँ ! तुम्हीं अनन्तकोटिब्रह्माण्डकी ऐश्वर्याधिष्ठात्री विष्णुप्रिया महालक्ष्मी भी हो। हे अम्ब ! आप ही तो कामेश्वरअंकनिलया अनन्तब्रह्माण्ड- जननी श्रीषोडशी महात्रिपुरसुन्दरी हो। हे जगदम्ब !