भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइष्टदेवकी उपासना ६०१
महामोहको उस प्रमादिताको देखकर बड़ा ही खेद और आश्चर्य होता है, जिससे आपका अनादर करके वे अन्य विषयोंमें महान् परिश्रम करते हैं। हे भगवन्! आपसे श्रेष्ठ ऐसा अन्य कोई न धर्म है, न अर्थ, न काम और न मोक्ष ही। भगवान् वासुदेवका स्मरण न होना ही परम हानि, परम उपद्रव, परम दुर्भाग्य है। परमानन्दकन्द मुकुन्द मधुसूदन भगवान् गोविन्दको छोड़कर मैं न तो अन्य किसीको जानता ही हूँ, न स्मरण करता हूँ, न भजता हूँ। न नमन करता हूँ, न किसी दूसरेकी स्तुति करता हूँ, न अन्यको आँखसे देखता हूँ, न स्पर्श करता हूँ, न अन्यत्र कहीं जाता हूँ, न बिना हरिके अन्यका गान करता हूँ।' इत्यादि श्लोकोंके द्वारा अनन्यताका स्वरूप प्रदर्शित किया है। शिव-विष्णुमें अभेद-बुद्धि इतना सब मन्थन करनेका तात्पर्य यही है कि भगवान् श्री