भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषय-सूची प्रथम खण्ड — श्रीकृष्णलीला-दर्शन
१. श्रीकृष्ण-जन्म .................................................. १५ ✤ श्रीनन्दराय और देवी नन्दरानीजीका परिचय . १५ ✤ नन्दरानीके पुत्रदर्शनका उल्लास ..................... १८ २. श्रीकृष्णकी बालक्रीडा ...................................... १९ ✤ जन्मोत्सवका उल्लास ....................................... १९ ✤ बालरूपकी झाँकी ............................................. १९ ✤ स्तुति-निवेदन ................................................. २० ✤ यशोदाजीको बालरूपके दर्शन .......................... २१ ✤ व्रजांगनाओंको माधुर्यरूप बालप्रभुका दर्शन ... २२ ✤ श्रीनन्दरानीद्वारा पयःपान कराना ..................... २३ ✤ श्रीब्रजेश्वरीका बालकृष्णके मनोरम अंगोंको देखकर मुग्ध होना ............................................ २३ ✤ बालदर्शनसे श्रीनन्दरायजी आनन्दमूर्च्छित हो गये ............................................................. २४ ✤ भगवान्का जातकर्म-संस्कारोत्सव ................ २४ ✤ श्रीगर्गजीद्वारा भगवान्का नामकरण-संस्कार . २५ ✤ श्रीबलभद्रजी और कृष्णजीकी माधुर्यमयी शिशुलीला ....................................................... २५ ✤ नवनीतचोरी-लीला ......................................... २६ ✤ मैया, मैं तो चन्द्र-खिलौना लैहों .................... २६ ✤ नर्तन और वेणुवादन-लीला ............................. २७ ३. भगवान्का मंगलमय स्वरूप ............................. २८ ✤ भगवान् सर्वथा अनुपमेय ................................ २८ ✤ भगवान्के मंगलमय दिव्य अंगोंकी शोभा ... २९ ✤ भगवान्के नेत्रोंकी अरुणिमा ............................ ३० ✤ भगवान्की दिव्य नासिकाकी शोभा ......... ३१ ✤ भगवान्के मधुर मन्द हास्ययुक्त मुखारविन्दकी शोभा .............................................................. ३२ ✤ दिव्य विग्रहके अनुलेपनकी शोभा ............ ३३ ✤ भगवान्का दिव्यातिदिव्य सौन्दर्य-माधुर्य ... ३५ ✤ भगवान्के कटितटकी शोभा .......................... ३६ ✤ भगवान्के चरणारविन्दोंकी शोभा ................... ३८ ✤ भगवान्के चरणचिह्नोंकी शोभा ................... ३९ ✤ भगवान्के युगलस्वरूपके चिन्तनसे अन्तः- करणकी निर्मलता ............................................. ४० ४. 'साक्षान्मन्मथमन्मथः' ........................................ ४१ ✤ भगवान् तथा कामदेवका संवाद ................. ४१ ✤ जीवात्मा और परमात्माका मिलन ............. ४४ ✤ आनन्दकी अभिलाषा ................................. ४७ ✤ भक्तियोगके विधानके लिये भगवान्का अवतरण ........................................................... ४८ ✤ भक्तिका ज्ञानरूपमें परिणमन ..................... ५२ ५. श्रीवृन्दावनमें वर्षा और शरद् ........................... ५३ ✤ श्रीमद्भागवतमें वर्णित वर्षा एवं शरद्- ऋतुकी शोभा ................................................ ५३ ✤ श्रीरामचरितमानसमें वर्षा एवं शरद्-ऋतुका वर्णन ................................................................ ५६ ६. वेणुरव ................................................................... ५६ ✤ वेणुवादन-भगवान्की मंगलमयी लीला ... ५६ ✤ वेणुध्वनि-श्रवणका विलक्षण प्रभाव ......... ५७ ७. किरातिनियोंका स्मररोग ................................... ५९ ✤ भगवत्सम्बन्धसे तृष्णा, काम आदि भी भूषण बन जाते हैं ...................................................... ६० ८. वेणुगीत ............................................................... ६४ ✤ भगवान्के श्रीचरणोंमें अनुराग होना लोकोत्तर सौभाग्य है ..................................................... ६५ ✤ भगवान्का वृन्दावन-आगमन ..................... ६६ ✤ श्रीवृन्दारण्यकी शोभा .................................... ६७ ✤ अदृश्य वस्तुकी सत्ताका दृष्टान्त ................ ६७ ✤ वृन्दावनमें भगवान्का आतिथ्य ................. ६९ ✤ भगवान्के प्रवेशसे वृन्दावनधाम रसमय हो गया ................................................................... ७१ ✤ भगवत्सम्मिलनके लिये उत्कण्ठाके उत्कर्षकी आवश्यकता ................................................... ७२ ✤ वेणु-कूजनका प्रभाव ................................... ७२ ✤ भक्तिका स्वरूप ......................................... ७७ ✤ भगवान्का विग्रह फलात्मक है, साधन नहीं ................................................................... ७८ ✤ बाह्य रमण और आन्तर रमण ...................... ७९ ✤ मनोमयी प्रतिमाका वैशिष्ट्य ...................... ७९ ✤ भक्तकी भावनाके अनुसार ही भगवान्का स्वरूपधारण .................................................... ७९ ✤ अमलात्मा महायोगीन्द्र भी भगवान्के लोकोत्तर माधुर्यसे मुग्ध हो जाते हैं ............................. ८०