भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशक्तिके योगसे विभिन्न-विभिन्न भक्तोंके भावानुसार भिन्न-भिन्न मंगलमय विग्रहरूपमें शिवपुराण तथा स्कन्दपुराणमें शिवरूपसे, विष्णुपुराणमें विष्णुरूपसे, श्रीमद्भागवतमें श्रीकृष्णरूपसे और श्रीरामायणमें श्रीरामभद्ररूपसे गाये जाते हैं— वेदे रामायणे चैव पुराणे भारते तथा। आदावन्ते च मध्ये च हरिः सर्वत्र गीयते ॥ (कल्किपुराण ३।२१।२८) अन्यथा जैसे विष्णुपुराणादिमें विष्णुका परत्व, सदाशिवादिका अपरत्व पाया जाता है; वैसे ही स्कन्दपुराणादि तथा महाभारतमें भी भीष्मके सामने युधिष्ठिरके लिये श्रीकृष्णमुखसे ही सदाशिवका परत्व और तदतिरिक्तका अपरत्व पाया जाता है। सच्चिदानन्दस्वरूप परब्रह्मकी निरावरण स्फूर्ति शिवादि पंचदेवोंमें एकातिरिक्त अन्योंकी निन्दा निज इष्टमें दृढ़ आस्था-सम्पादनकी विधा शिवपरक पुराणोंको तामस, राजस बतलाकर उनसे पीछा छुड़ाना भी सहृदयहृदयग्राह्य नहीं हो सकता; क्योंकि शिवपरक पुराणों