भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअनेकार्थनामवर्गः ९५३ अम्बष्ठा—पाठा, चाङ्गेरी, माचिका, यूथिका च इति । ३ अम्बष्ठा—पाठी, चांगेरी, माचिका और जूही। इति चतुर्थार्थकानि नामानि । अथ बह्वर्थकानि नामान्याह बहुत अर्थवाले शब्द अक्षशब्दः स्मृतोऽष्टासु सौवर्चलबिभीतके। कर्षपद्माक्षरुद्राक्षशकटेन्द्रियपाशके ॥१॥ १. अक्ष—(१) काला नमक, (२) बहेड़ा, (३) कर्षनामक तौल (४) कमलगट्टा, (५) रुद्राक्ष, (६) गाड़ी, (७) इन्द्रिय और (८) पासा (जुआ खेलने का साधन) इन ८ अर्थों में अक्ष का प्रयोग होता है ॥१॥ काकाख्यः काकमाची च काकोली काकणन्तिका । काकजङ्घा काकनासा काकोदुम्बरिकाऽपि च॥ सप्तस्वर्थेषु कथितः काकशब्दो विचक्षणैः ॥२॥ २. काक—(१) कौवा, (२) मकोय, (३) काकोली, (४) लाल गुञ्जा, (५) काकजङ्घा, (६) काकनासा और (७) कठूमर इन सात अर्थों में काक शब्द का प्रयोग होता हैं।।२।। सर्पद्विरदमेषेषु सीसके नागकेसरे। नागवल्ल्यां नागदन्त्यां नागशब्दः प्रयुज्यते ॥३॥ ३. नाग—(१) साँप, (२) हाथी, (३) भेड़ा, (४) सीसा (धातु), (५) नागकेसर, (६) पान और (७) नागदन्ती (दन्तीभेद) इन ७ अर्थों में नाग शब्द का प्रयोग होता है ॥३॥ मांसद्रवे चेक्षुरसे पारदे मधुरादिषु । बोले¹ रागे विषे नीरे रसो नवसु वर्त्तते ॥४॥ ४ रसः—(१) मांस का रस, (२) द्रव पदार्थ, (३) ऊख का रस, (४) पारा, (५) मधुरादि ६ प्रकार के रस, (६) बोल, (७) राग (अनुराग), (८) विष और (९) जल इन ९ अर्थों में रस शब्द का प्रयोग होता है ॥४४॥ इति श्रीमिश्रलटकनतनय श्रीमिश्रभावविरचिते भावप्रकाशे वर्गप्रकरणे अनेकार्थवर्गः समाप्तः । इति भावप्रकाशे पूर्वखण्डे प्रथमभागे द्रव्यगुणप्रकरणापरनामकं षष्ठं मिश्रप्रकरणं समाप्तम् ॥६॥ समाप्तश्चायं निघण्टुभागः । १. स्वादेति पाठा०।