भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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प्रयोजन (किसी काम में नहीं लेने योग्य) * होता है। जो आमपाक (कच्चा पाक) अर्थात् जिसका कल्क अधिक सरस होता है, वह निर्वीर्य, अग्नि को मन्द करने * वाला और गुरु होता है॥ * अथ मृद्वादिपाकानां विषयानाह- * नस्यार्थं स्यान्मृदुः पाको मध्यमः सर्वकर्मसु। अभ्यङ्गार्थः खरः प्रोक्तो युञ्ज्यादेवं यथोचितम् ।।६५।। (Check punctuation:।।६५।।- double danda) * मृदु आदि पाकों के विषय-नस्यकर्म के लिये (नाम लेने के लिये) मृदुपाक स्नेह उत्तम होता है और सभी कार्यों Wait, look at(नाम लेने के लिये)again. Wait, could it be(नास लेने के लिये)? Let's look at the letter: Is it or? Look at के लिये: ल, य. Look at नाम: Left stroke: vertical down, loops left-up-right, goes right to vertical stem. That is 100% म`. Wait, in Hindi, is "नास लेना" a thing? Yes, but

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