भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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समुदितानां दोषाणाम् । अंशांशकल्पना=हीनमध्याधिकभेदैर्भागकल्पना विकल्पः ।।२८।। (Wait, in line 8: समवेतानां=समुदितानां) Line 9: यहाँ 'समवेतानां दोषाणाम्' पदों का 'एकत्र हुये दोषों की' तथा 'अंशांशकल्पना विकल्पः' पदों का 'एकत्र हुये दोषों Line 10: में से कौन दोष सबसे हीन, कौन मध्यम और कौन दोष सबसे अधिक है इस प्रकार दोषों के भागों की जो कल्पना है Line 11: उसी को विकल्प कहते हैं' यह समझना चाहिये ॥ Line 12: अथ प्राधान्यव्याख्यानमाह- Line 13: स्वातन्त्र्यपारतन्त्र्याभ्यां व्याधेः प्राधान्यमादिशेत् ।।२९।। Line 14: प्राधान्यसंप्राप्ति-रोगों की स्वतन्त्रता तथा परतन्त्रता से प्राधान्यसंप्राप्ति कहनी चाहिये ॥२९॥ Line 15: ❖ व्याधेः स्वातन्त्र्येण प्राधान्यं, पारतन्त्र्येणाप्राधान्यञ्च वदेदित्यर्थः । यथा स्वतन्त्रस्य ज्वरस्य प्राधान्यं, Line 16: ज्वराधीनानां श्वासादीनामप्राधान्यम् ।।२९।। Line 17: यहाँ यह समझना चाहिये कि-रोगों की