भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट १ १०८५ पीठ की (Thoracic) कशेरुका १२ | गुदा प्रदेश में पुच्छास्थि (Coccyx) १ कटि की (Lumber) कशेरुका ५ | योग २६ | त्रिकास्थियाँ (Sacrum) अस्थि की परीक्षा करने पर वह ५ कशेरुकों के मिलने से बनी मालूम होती है इसी प्रकार पुच्छास्थि (Coccyx) भी ४ अस्थियों से मिलकर बनी है। वक्ष की २५ अस्थियाँ उरोऽस्थि (Sternum) १ | पर्शुकाएँ (Rids) २४ योग २५ कान के भीतर मध्यकर्ण में ६ छोटी-छोटी अस्थियाँ रहती हैं। प्रत्येक कर्ण के भीतर मध्य कर्ण में ३-३ अस्थियाँ होती हैं। जिनके नाम ये हैं— कान की ६ अस्थियाँ शूर्मिकास्थि (इङ्कस) २ मुद्गरास्थि (मैलियस) २ रकावास्थि (स्टैपीज) २ योग=६ इस प्रकार सामान्य २०६ अस्थियाँ मानी जाती हैं। अस्थियों के प्रकार जैसा कि सुश्रुत लिखते हैं:— 'एतानि पञ्चविधानि भवन्ति तद्यथा-कपालरुचकतरुणवलयनलकसंज्ञकानि' अर्थात् १ कपाल, २ रुचक, ३ तरुण, ४ वलय, ५ नलक इस भाँति से पाँच प्रकार की अस्थियाँ होती हैं। १ कपाल। २ रुचक—(दाँत) ये आज से प्रायः ५० वर्ष पूर्व अस्थि में ही पाश्चात्य सिद्धान्त के अनुसार भी गिने जाते थे किन्तु आजकल अस्थियों की रचना से इनकी रचना भिन्न होने के कारण अस्थि से पृथक् गिने जाते हैं। ३ तरुण—आजकल पाश्चात्य विज्ञान के अनुसार इनको सृक्ति कहा जाता है। ये भी अस्थियों से पृथक् माने जाते हैं। ४ वलय—पर्शुका आदि मुड़ी हुई अस्थियाँ इसके अन्दर आती हैं। ५ नलक-Long bones दीर्घ अस्थियाँ। अस्थियों की स्थिति 'तेषां जानुनितम्बांसगण्डतालुशङ्खशिरःसु कपालानि, दशनास्तु रुचकानि, घ्राणकर्णग्रीवाक्षिकोषेषु तरुणानि, पार्श्वपृष्ठोरःसु वलयानि, शेषाणि नलकसंज्ञकानि' (सु.शा.अ. ५) जानु, नितम्ब, स्कन्ध, कपोल, तालु, शंख तथा सिर में कपालास्थियाँ (Flats bones) हैं। CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA