भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट १ १०८७ रस बनता है, रस से रक्त, रक्त से मांस, मांस से मेद, मेद से अस्थि, अस्थि से मज्जा तथा मज्जा से शुक्र का निर्माण होता है। इस प्रकार मांसपेशियाँ रस से ही बनती हैं। किन्तु मांस के आहार से रस-रक्तादि की अपेक्षा मांस अधिक बनता है। शरीर के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न आकार के मांस का समूह रहता है। उन्हें हम पेशियाँ कहते हैं। मांसपेशियों का कार्य सिरास्नावस्थ्यपर्वाणि सन्थयश्च शरीरिणाम्। पेशीभिः संवृतान्यत्र बलवन्ति भवन्त्यतः।। (सु.शारीर.अ. ५) शरीर की सिरायें, स्नायु, अस्थियों के पर्व तथा सन्धियाँ, पेशियों से भलीभाँति आवृत हैं। अतः वे (सिरा आदि) बलवती होती हैं। शरीर में चलने-फिरने, उठने-बैठने आदि में गति होती है। इसके अतिरिक्त हाथ को हिलाना, पलकों को चलाना, बोलना, श्वास, मैथुन आदि जितनी भी गतियाँ शरीर में होती हैं मांस ही सब का कारण है। बिना मांस के किसी भी स्थान में गति नहीं होती। इस प्रकार किसी प्रकार की गति के लिये मांस आवश्यक है। इनमें सङ्कुचित तथा विस्तृत होने का खास गुण होता है। सारे शरीर के मांसों को पाश्चात्त्य विज्ञान के अनुसार दो भागों में विभाजित किया जाता है— १. ऐच्छिक मांसपेशियाँ। २. अनैच्छिक मांसपेशियाँ। १. ऐच्छिक पेशियाँ वे हैं जिन पर अपना अधिकार है जिनका इच्छानुसार संकोच तथा विस्तार कर सकते हैं, प्रायः अस्थियों पर लगी हुई पेशियाँ इसी समूह की होती हैं। २. अनैच्छिक मांसपेशियाँ वे हैं जिनमें अपनी इच्छा के अनुसार संकोच या विस्तार आदि कुछ भी परिवर्तन नहीं कर सकते, आन्त्र आदि शरीर के भीतरी अङ्ग इन्हीं पेशियों से निर्मित हैं। पेशियों की संख्या 'पञ्च पेशीशतानि भवन्ति, तासां चत्वारि शतानि शाखासु, कोष्ठे षट्षष्टिः, ग्रीवां प्रत्यूर्ध्वं चतुस्त्रिंशत्' ।। सुश्रुत शारीर. अ. ५ ।। पेशियां ५०० होती हैं, उनमें शाखा में ४००, कोष्ठों में ६६ तथा ग्रीवा में ३४ ये मिलकर ५०० होती हैं। 'एकैकस्यां पादाङ्गुल्यां तिस्रस्तिस्रस्ताः पञ्चदश, दश प्रपदे, पादोपरि कूर्चसन्निविष्टास्तावत्य एव, दश गुल्फतलयोः, गुल्फजान्वन्तरे विंशतिः, पञ्च जानुनि, विंशतिरूरौ, दश वङ्क्षणे, शतमेवमेकस्मिन्सक्थिन भवन्ति। एतेनेतरसक्थि बाहू च व्याख्यातौ' । पैर की १०० मांसपेशियाँ प्रत्येक पैर की अङ्गुलियों में ३-३ (३×५)=१५ पेशियाँ पैर के अगले प्रान्त (प्रपद) में १० गुल्फ तथा जानु (घुटने) के भीतर २० (प्रपदं पादाग्रमिति डल्हणः) जानु में ५ पैर के ऊपर कूर्च स्थान में लगी हुई पेशियाँ १० ऊरु (जाँघ) में २० गुल्फ (टखना) पादतल में मिलकर १० वङ्क्षण सन्धि में १० योग १०० इस प्रकार कुल शाखाओं में (१००×४) ४०० मांसपेशियां हुईं।