भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

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परिशिष्ट ९ १०८९ वक्षोदर मध्यस्था पेशी १. स्वरयन्त्र-की विशेष पेशियाँ ५ गले की मांसपेशियाँ ५. ‘बाह्य कर्ण विशेष पेशियाँ ६ जिह्वा की विशेष पेशियाँ ४. मध्य कर्ण विशेष पेशियाँ २ तालु विशेष पेशियाँ ४. अक्षिगोलक तथा ऊपरी पलक ७ योग ३४ यह एक ओर का हुआ दोनों भीतर तथा बाहर के ओर की पेशियों की संख्या=३४×२)=६८ इस प्रकार ४५० ६८ ग्रीवा तथा नेत्र गोलक आदि की पेशियाँ १ वक्षोदर मध्यस्था कुल पेशियां ५१९ पेशियों की स्थिति तथा कार्य के अनुसार विविध नाम उनके दिये गये हैं । जो कि प्रसंग बढ़ जाने के भय से यहाँ नहीं लिखे जा सकते । नारी-जननेन्द्रियों का संक्षिप्त विवरण सुश्रुत ने योनि की जो परिभाषा लिखी है उसके अनुसार आजकल के भग (Vulba), योनि (Vagina) तथा गर्भाशय (Uterus) ये सभी अङ्ग आ जाते हैं । सुश्रुत लिखते हैं— शङ्खनाभ्याकृतिर्योनिस्त्र्यावर्त्ता सा प्रकीर्त्तिता । तस्यास्तृतीये त्वावर्त्ते गर्भशय्या प्रतिष्ठिता ।। यथा रोहितमत्स्यस्य मुखं भवति रूपतः । तत्संस्थानां तथारूपां गर्भशय्यां विदुर्बुधाः ।। (सुश्रुतसंहिता) इससे स्पष्ट विदित होता है कि योनि के भीतरी भाग को ही वे गर्भाशय मानते हैं । इस विषय में आधुनिक वैज्ञानिकों का जो वर्णन मिलता है संक्षेप में उसकी चर्चा अनावश्यक न होगी । वे उत्पादक अङ्गों (Genaratine Organs) को दो भागों में विभाजित करते हैं— १. बाह्य जननेन्द्रियाँ तथा २. आभ्यन्तरिक जननेन्द्रियाँ । १. बाह्य जननेन्द्रियाँ—वे हैं जो बाहर से देखी जाती हैं । इनके समूह को (Vulba) कहते हैं । २. आभ्यन्तरिक जननेन्द्रियाँ—वे हैं जो कि वस्तिगुहा (Pelvic cavity) के अन्दर रहती हैं । बाह्यजननेन्द्रियाँ—इनमें निम्नलिखित भाग आते हैं । १. कामाद्रि (Mous veneres) २. बृहद् भगोष्ठ (Labia majora) ३. क्षुद्रभगोष्ठ (Lmiaibnora) ४ भगाङ्कुर (Clitoris) ५. योनिद्वार (Vaginal orifice) ६. मूत्रद्वार (Urethral orifiee) ७. योनिच्छद (Hyman) इनमें से प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया जा रहा है:— १. कामाद्रि (Mous veneres)—भग के ऊर्ध्वप्रदेश में होता है । तथा विटपसन्धि की सीध में होता है । इस स्थान में नीचे की ओर वसा (fat) रहती है । युवावस्था (Puberty) के आने पर इस स्थान पर लोम उगते हैं । ७२ भाव.I

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