भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०९६ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे को Ovulation कहते हैं। आर्तव के समय गर्भाशय की कला (Endometrium) में रक्ताधिक्य होता है तथा वह मुलायम हो जाती है जिससे कि भ्रूण वहाँ पर चिपक सके। आर्तव के रक्त में खटिक की अधिकता होती है यह पहले कहा जा चुका है। स्त्री के रक्त में इस खटिक (Caloium) की भ्रूण की वृद्धि के लिये आवश्यकता होती है। गर्भाधान न होने पर रक्त का बढ़ा हुआ खटिक द्रव्य आर्तव द्वारा निकल जाता है। इसके साथ ही साथ गर्भाशय कला भी फट जाती है तथा उसके टुकड़े रक्त के साथ निकलते हैं। 'Graen Armytaga' ने लिखा है— 'Menstruation is unfertile Abortion of the unpregnant descidua it is the Uterus weeping for the death of the an unfertilized ovum', जब गर्भाधान हो जाता है तब खटिक का उपयोग भ्रूण के शरीर बनने में होता है अतः गर्भावस्था में आर्तव बन्द होता है। पूर्व में कहा जा चुका है कि-आर्तव साधारणतः १३ वर्ष से प्रारम्भ होता है और ४० से ५० वर्ष की आयु में बन्द हो जाता है। आर्तव जिस समय बन्द होने को होता है (रजोनिवृत्ति के समय) कभी-कभी पाचनसंस्थान, रक्तवाहक संस्थान तथा नाड़ीसंस्थान के कुछ विकार प्रकट होते हैं। पाचनशक्ति में विकृति हो जाती है तथा स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा हो जाता है। और कभी-कभी शरीर पर उष्णता की लहरों का प्रवाह सा मालूम होता है। आर्तव कभी-कभी थोड़ा-थोड़ा होता रहता है और शनैः-शनैः बन्द हो जाता। कभी-कभी आर्तव एकाएक बन्द होता है। स्त्री इस अवस्था में कुछ स्थूल हो जाती है। उदर में मेद बढ़ जाता है। किसी-किसी स्त्री के चेहरे पर झुर्रियाँ, पुरुषों की तरह रोम उग आते हैं। यह देखा गया है कि यह अवस्था (Menopause) बाल्यावस्था में विवाह हो गया हो तो और भी शीघ्र प्रकट होती है। यदि गर्भाशय या डिम्बग्रन्थि (Ovary) को शस्त्र-कर्म द्वारा निकाल दिया जाय तो आर्तव के समय में ही (४० वर्ष के पूर्व ही जिस समय Ovary या Uterus को निकाला गया है) रजोनिवृत्ति (Menopause) हो जायगी इसे कृत्रिम रजोनिवृत्ति या (Artificial menopause) कहते हैं। वास्तव में आर्तव प्रारम्भ होने के समय से आर्तव बन्द होने के बीच का ही समय सन्तानोत्पत्ति के लिए अच्छा है। प्रायः रजोदर्शन के पूर्व तथा रजोनिवृत्ति (Menopause) के पश्चात् गर्भाधान नहीं होता। आर्तव काल में स्राव की मात्रा २ से ८ औंस तक हो सकती है इससे कम या अधिक स्राव का निकलना किसी विकृति की ओर ध्यान आकर्षित कराता है। आर्तव का रक्त गर्भाशय में जमा हुआ थक्के के रूप में होता है। वह थक्का शनैः शनैः घुल कर द्रवरूप में परिणत होता है इसी को आर्तव कहते हैं। यह द्रव होने की क्रिया गर्भाशय में स्थित ग्रन्थियों (uterinegland) के उद्रेचन (Secretion) द्वारा निकले हुए फाइब्रिनोलाइसिन (Fibrinolysin) के कारण होती है। इस फाइब्रिनोलाइसिन का कार्य है कि गर्भाशय के अन्दर जमे हुये रक्त को द्रवरूप में परिणत करे। यथा टेनटीचर (Tente acher) स्वरचित मिडवाइफरी (Midwifery) में लिखते हैं— White house attributes the clotting to throwbokinase derived from the endome- trial tissues thrown of during menstruation. White house Contends that menstruating uterus Normally always contains a clot and this clot gradually eid producing the Fluid which is known as menstrual blood. 'While the solution of the clot, he believes is brought a bout by fibrinolysin CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA