भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 1167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 174

अथ पञ्चम दिनचर्यादिप्रकरणम् १२१ ❖ घनसारः=कर्पूरः, बालकम्=ह्रीबेरम् ।। ९५ ।। 'घनसार' से 'कर्पूर' तथा 'बालक' से 'ह्रीबेर' (सुगन्धबाला) समझना चाहिये ।। ९५ ।। अथ वर्षाकाले प्रलेपार्हद्रव्यगुणानाह- चन्दनं घुसुणोपेतं मृगनाभिसमायुतम् । न चोष्णं न च वा शीतं वर्षाकाले तदिष्यते ।। ९६ ।। वर्षाकाल में प्रलेप के योग्य द्रव्य—केशर और कस्तूरी से युक्त चन्दन का प्रलेप वर्षाकाल में प्रशस्त होता है। क्योंकि यह न तो शीतल होता है और न उष्ण होता है ।। ९६ ।। घुमृणं=कुङ्कुमम् । मृगनाभिः=कस्तूरी ।। ९६ ।। 'घुसृण' से 'कुङ्कुम' (केशर) और 'मृगनाभि' से 'कस्तूरी' का ग्रहण करना चाहिये ।। ९६ ।। अथ सामान्यतोऽनुलेपगुणवर्णनपूर्वकं तदनर्हजनमप्याह- अनुलेपस्तृषामूर्च्छादुर्गन्धस्वेददाह